श्रीलंका ने रूस से उधार तेल लेने की मांग की
आर्थिक स्थति के ख़राब होने के कारण श्रीलंका ने रूस के उधार तेल लेने की मांग की है।
श्रीलंका के राष्ट्रपति राजपक्षे गोटाबाया ने रूसी राष्ट्रपति विलादिमीर पुतीन से उधार तेल लेने की बात कही है।
श्रीलंका के राष्ट्रपति, रूस से उधार तेल लेने की मांग एसी स्थति में कर रहे हैं कि जब इस देश का विदेशी मुद्रा भण्डार समाप्त हो चुका है। एसे में आयात किये जाने वाले तेल का भुगतान कैसे किया जाएगा यह एक बड़ा सवाल है।
रिपोर्टों मे बताया गया है कि वहां के लोगों के पास ज़रूरत की चीज़ें ख़रीदने के लिए पैसा नहीं है। जिनके पास पैसा है भी उनको सामान ख़रीदने के लिए लंबी-लंबी क़तारों में खड़ा होना पड़ता है और उनको बहुत सीमित सामान ही मिल पाता है। हालांकि इससे पहले श्रीलंका की सरकार कुछ देशों से आर्थिक सहायता हासिल कर चुकी है किंतु उससे उसका कोई भला नहीं हुआ।
श्रीलंका की सरकार ने सार्वजनिक सेवाओं के लिए विदेश से बहुत बड़ी मात्रा में पैसा क़र्ज के रूप में लिया था जिसको वह बाद में चुका नहीं पाया और यही क़र्ज़, श्रीलंका के आर्थिक संकट की भूमिका बना। अभी पुराना क़र्ज़ अदा हो नहीं पाया है किंतु श्रीलंका के राष्ट्रपति ने रूस से उधार तेल आयात करने की मांग कर दी है।
टीकाकारों का कहना है कि जब किसी देश की आर्थिक स्थति अस्थिर हो तो एसे में अगर विदेश से क़र्ज़ लिया जाए तो फिर उस देश के दिवालिया होने का जोखिम बना रहता है। इसका कारण यह है कि पुराने क़र्ज़ को निपटाने के लिए अधिक नया क़र्ज़ लेना पड़ता है। इस प्रकार से क़र्ज़ का एक दुष्चक्र चल निकलता है जो समाप्त होने का नाम नहीं लेता।
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