तालेबान ने अधिक ख़राब किये अफ़ग़ानिस्तान के हालात
जबसे तालेबान से अफ़ग़ानिस्तान की सत्ता संभाली है इस देश की स्थति हर दिन ख़राब हो रही है।
तालेबान को अफ़ग़ानिस्तान की सत्ता अपने हाथ में लिए हुए एक वर्ष का समय हो चुका है। इस दौरान अफ़ग़ानिस्तान की जनता को कई प्रकार की समस्याओं का सामना रहा है।
तालेबान ने अगस्त 2021 को अफ़ग़ानिस्तान में सत्ता संभाली थी। इस देश का नियंत्रण अपने हाथ में लेते ही तालेबान ने कई वचन दिये थे जैसेकि यहां के लोगों की समस्याओं का वे समाधान करेंगे, लोगों की सुरक्षा को सुनिश्चित बनाएंगे और उनको स्वतंत्र रहने का अधिकार होगा।
काबुल पर क़ब्ज़े के बाद तालेबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने अपनी प्रेस कांफ्रेंस में जो कुछ कहा था उसमें से किसी पर भी तालेबान ने इस एक साल के दौरान अमल नहीं किया। तालेबान ने यह वचन दिया था कि अफ़ग़ानिस्तान के लोग अपने जीवन में भविष्य में सकारात्मक परिवर्तन देखेंगे।
हालांकि पिछले एक वर्ष में वहां के लोगों की स्थति अच्छी होने के बजाए बुरी हुई है। अफ़ग़ानिस्तान में इस दौरान मंहगाई बढ़ी है, बेरोज़गारी में वृद्धि हुई है और लोगों में असुरक्षा की भावना पैदा हुई है। इसी बीच राष्ट्रसंघ ने अफ़ग़ानिस्तान में बढ़ती भुखमरी को देखते हुए वहां पर मानव त्रासदी की चेतावनी जारी की है।
तालेबान ने यह बात बहुत ज़ोर-शोर से उठाई थी कि अफ़ग़ानिस्तान में रहने वाले अल्पंसख्यकों को सुरक्षा प्रदान की जाएगी। पिछले एक वर्ष के दौरान वहां के अल्पसंख्यकों के भीतर असुरक्षा की भावना अधिक बढ़ी है। उनके विरुद्ध आतंकी कार्यवाहिंया की जा रही हैं जिनको रोकने में तालेबान पूरी तरह से विफल रहा है। अफ़ग़ानिस्तान के शिया समुदाय के विरुद्ध कई बार दाइश ने हमले किये जिनको तालेबान रोक नहीं सके। उनकी मस्जिदों और इमाम बाड़ों पर लगातार हमले हुए हैं।
इसी प्रकार से तालेबान ने यह भी वचन दिया था कि अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं के अधिकारों का सम्मान किया जाएगा। एक वर्ष गुज़र जाने के बाद वहां के महिलाओं को अपने अधिकार मिलता तो दूर की बात अभी वहां पर लड़कियों के स्कूल खोले जाने को लेकर ही विवाद चल रहा है।
तालेबान के प्रवक्ता ने एक साल पहले यह भी दिलासा दिलाया था कि संचार माध्यमों को अफ़ग़ानिस्तान में पूरी आज़ादी के साथ काम करने की अनुमति होगी जबकि वहां पर मीडिया को आंशिक आज़ादी ही हासिल है। तालेबान ने उनके विरुद्ध कई नए और कठोर नियम निर्धारित कर दिय हैं। विश्व समुदाय की भारी दबाव में आकर तालेबान ने अफ़ग़ानिस्तान में एक समावेशी सरकार के गठन की बात को स्वीकार कर लिया था किंतु इस दौरान इस बारे में कोई भी कार्यवाही नहीं की गई। उनके यहां एक विशेष जाति को ही महत्व दिया जाता है।
तालेबान के इन क्रियाकलापों के कारण अफ़ग़ानिस्तान की जनता के भीतर उनके बारे में सकारात्मक सोच नहीं पाई जाती। शायद यही वजह है कि तालेबान की सरकार को अबतक अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता नहीं मिल पा रही है। एसा लगता है कि जबतक तालेबान अपने दिये हुए वचनों को पूरा नहीं करेंगे और वहां की जनता का सम्मान नहीं करेंगे उस समय तक अफ़ग़ानिस्तान की वर्तमान स्थति में सुधार होना संभव नहीं है।
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