तालेबान ने ली रूसी दूतावास की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी
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तालेबान की सरकार ने अफ़ग़ानिस्तान मेंं स्थित रूस के दूतावास की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी स्वीकार की है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Sep ०७, २०२२ ११:२१ Asia/Kolkata

तालेबान की सरकार ने अफ़ग़ानिस्तान मेंं स्थित रूस के दूतावास की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी स्वीकार की है।

तालेबान के विदेश मंत्रालय के प्रभारी अमीर ख़ान मुत्तकी ने कहा कि हमारी सरकार काबुल में मौजूद रूसी दूतावास की सुरक्षा पर विशेष ध्यान केन्द्रित करेगी।

उनका यह बयान काबुल में रूस के दूतावास के निकट होने वाले बम विस्फोट के बाद आया है।  इस विस्फोट में मारे जाने वाले 20 लोगों में रूसी दूतावास के दो कर्मचारी भी शामिल हैं।  अफ़ग़ानिस्तान में होने वाला यह हमला, पिछले हमलों से कुछ अलग प्रकार का था।  इससे पहले वाले हमलों में सामान्यतः आम लोगों, बाज़ारों और पवित्र स्थलों को निशाना बनाया जाता था।  इन आतंकवादी कार्यवाहियों की ज़िम्मेदारी बाद में आतंकवादी गुट दाइश की ओर से स्वीकार की जाती रही है।

सोमवार को काबुल में रूसी दूतावास के बाहर किया जाने वाले आत्मघाती हमले से एसा संदेश देने की कोशिश की गई है मानो अफ़ग़ानिस्तान में अब कोई भी स्थान सुरक्षित नहीं बच सका है।  तालेबान की ओर से अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षा के दावे को ताज़ा हमला पूरी तरह से निरस्त करता है।  अब एसा लगता है कि तालेबान अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था को सही ढंग से संभाल नहीं पा रहा है।

अफ़ग़ानिस्तान के हालात के बारे में अन्तर्राष्ट्रीय मामलों के एक जानकार, माइकल कोग्लमेन कहते हैं कि दाइश, स्वयं को न केवल अफ़ग़ानिस्तान में बल्कि पूरे क्षेत्र में तालेबान के प्रतिस्पर्धी के रूप में दर्शाने के प्रयास में है।  यही कारण है कि आतंकी हमलों के तत्काल बाद दाइश की ओर से इसकी ज़िम्मेदारी स्वीकार की जाती है।  रूस के दूतावास के बाहर हमने की ज़िम्मेदारी इसीलिए दाइश ने शायद फौरन स्वीकार की है।  कुछ जानकारों का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान मेंं शायद एसे गुट भी हैं जो इस देश में रूस की गतिविधियां नहीं चाहते हैं।  एसे में एक संभावना यह भी पाई जाती है कि सीरिया में रुस की भूमिका का बदला लेने के लिए अफ़ग़ानिस्तान में रूसी दूतावास को आक्रमण का निशाना बनाया गया है।

इस बारे में टीकाकारों का कहना है कि सीरिया में दाइश की पराजय ने उसे रूस से बदला लेने के लिए उकसाया है।  दाइश, जो आरंभ से ख़िलाफ़त का दावा करता आया है वह अपने दृष्टिगत सरकार को अफ़ग़ानिस्तान में व्यवहारिक बनाने के अथक प्रयास कर रहा है।  इसीलिए वह पूरी शक्ति के साथ तालेबान के मुक़ाबले में डट गया है।  अगर वास्तव में यह बात सही है तो तालेबान को इस प्रकार के विस्फोटों और हमलों को महत्वहीन नहीं समझना चाहिए।

बताई जाने वाली संभावनाओं में से चाहे कोई भी संभावना सही हो, यह एक वास्तविकता है कि अफ़ग़ानिस्तान में बढ़ते आतंकी हमलों ने इस देश में ख़तरे की घंटी बजा दी है।  रूसी दूतावास के बाहर आतंकी हमले ने जहां तालेबान को चिंता में डाल दिया है वहीं पर अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर तालेबान की पोज़ीशन पर भी प्रश्न चिन्ह लगा दिया है।

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