जापान के विदेशमंत्री की चिंता का क्या है समाधान?
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जापान के विदेशमंत्री कहते हैं कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद उनका देश इस समय सबसे गंभीर सुरक्षा स्थति का सामना कर रहा है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Feb २०, २०२३ १४:०० Asia/Kolkata

जापान के विदेशमंत्री कहते हैं कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद उनका देश इस समय सबसे गंभीर सुरक्षा स्थति का सामना कर रहा है।

म्यूनिख सम्मेलन में बोलते हुए Yoshimasa Hayashi योशीमाशा हयाशी ने कहा कि उनका देश रूस के विरुद्ध लगाए गए अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों में सक्रिय भागीदारी कर रहा है।  उनका कहना था कि इस बात की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए कि विश्व के किसी भी क्षेत्र में मौजूदा हालात को बदलने के लिए सैन्य अभियान का सहारा लिया जाए।  जापान के विदेशमंत्री ने यह भी कहा कि उनके देश के निकटवर्ती जल क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां और साथ ही उत्तरी कोरिया के मिसाइल परीक्षण का क्रम जारी है।  उन्होंने कहा कि इन बातों ने पूर्वी एशिया में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। 

हालांकि उन्होंने अपने भाषण में यह नहीं बताया कि क्षेत्र को सुरक्षा की दृष्टि से अशांति करने में उनके देश का हिस्सा कितना है।  हालिया कुछ वर्षों के दौरान क्षेत्र में अशांति उत्पन्न करने में जापान की भूमिका को अनेदखा नहीं किया जा सकता।  जापान की कुछ गतिविधियां, क्षेत्र में सुरक्षा अशांति का कारण बनी हैं। 

इस संदर्भ में अन्तर्राष्ट्रीय मामलों के जानकार हेनरी कैसेंजर कहते हैं कि चीन विरोधी अमरीकी नीतियां, क्षेत्र को संकटग्रस्त कर सकती हैं।वे कहते हैं कि अमरीका को यह भी सोचना चाहिए कि चीन और उत्तरी कोरिया को सीमित करना अमरीका और उसके घटकों के हित में नहीं है।  यह काम केवल क्षेत्र की सुरक्षा स्थति को संकटग्रस्त बनाएगा।  इसका इलाज यह है कि अमरीका और उसके घटक इस बारे में तार्किक ढंग से काम करें। 

यह वास्तविकता है कि अमरीका और उसके घटक क्षेत्र में अपनी सैन्य शक्ति को मज़बूत करने के लिए चीन और उत्तरी कोरिया का भय दिखाकर अपना उल्लू सीधा करना चाहते हैं।  इसी बीच जापान चाहता है कि वह अवसर का लाभ उठाते हुए एक सैन्य शक्ति के रूप में स्थापित हो जाए।  एसे में स्वभाविक है कि चीन और उत्तरी कोरिया अपनी सैन्य शक्ति को बढ़ाने के प्रयास करेंगे जिसका परिणाम वहीं निकलेगा जिसका उल्लेख जापान के विदेशमंत्री ने म्यूनिख सम्मेलन में किया।  अब अगर जापान वास्तव में क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता का इच्छुक है तो उसको अपनी सैन्य नीतियों पर पुनर्विचार करना होगा।  क्षेत्र की स्थति के सैन्य संतुलन का ख़राब होना किसी भी पक्ष के हित में नहीं है। 

यह बात पूरी तरह से स्पष्ट है कि पूर्वी एशिया सहित विश्व के किसी भी क्षेत्र में शांति की स्थापना, क्षेत्र की सभी शक्तियों की सहकारिता से ही संभव है।  यह तो नहीं हो सकता कि किसी एक क्षेत्र की कोई शक्ति अपनी मनमानी करती रहे और अन्य शक्तियां, ख़ोमश उसको देखती रहें।  इसलिए जापान सहित क्षेत्र में सबके लिए यही बात उचित है कि वे परस्पर सहयोग करें और कोई भी भड़काने वाली कार्यवाही न करें।

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