क्या संयुक्त राष्ट्र संघ तालिबान को मान्यता देने जा रहा है?
क़तर की राजधानी दोहा में पिछले कुछ वर्षों के दौरान, अफ़ग़ानिस्तान के बारे में कई महत्वपूर्ण बैठकें हो चुकी हैं, आज भी यहां संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की अध्यक्षता में दो दिवसीय बैठक आयोजित हो रही है, जिसमें 25 देश शामिल हो रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस सम्मेलन के मेज़बान के रूप में क़तर पहुंचे और उन्होंने घोषणा कर दी कि इस सम्मेलन में विश्व स्तर पर एक समझ हासिल करने और अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सरकार के साथ बातचीत करने के तरीक़े पर चर्चा होगी।
संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता ने एक बयान जारी करके बताया कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव इस सम्मेलन में 25 ने एक बयान । ित हो रही हैंयुक्त राष्ट्र महासचिव ओं को स्वीकार करने से आपको अपने इर्द-गिर्द के माहौल को एक अदेशों के प्रतिनिधियों की मेज़बानी करेंगे, ताकि अफ़ग़ानिस्तान के प्रमुख मुद्दों जैसे मानवाधिकार, महिलाओं और लड़कियों के अधिकार, एक समावेशी सरकार का गठन, आतंकवाद और नशीले पदार्थों से संघर्ष पर एक साझा समझ उत्पन्न हो सके।
संयुक्त राष्ट्र ने इससे पहले दोहा बैठक में तालिबान को मान्यता देने के मुद्दे को ख़ारिज कर दिया था, लेकिन अब लगता है कि अफ़ग़ानिस्तान को लेकर तालिबान के साथ बातचीत ही इस बैठक का मुख्य मुद्दा है। इस बीच, अफ़ग़ान नागरिकों ने तालिबान गुट को मान्यता देने का विरोध किया है। दुनिया भर के विभिन्न शहरों में अफ़ग़ान नागरिकों ने प्रदर्शन किया है और विश्व समुदाय से मांग की है कि वह तालिबान सरकार को मान्यता न दे।
संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव आमेना मोहम्मद के इस बयान के बाद कि तालिबान गुट को मान्यता देने के मक़सद से एक छोटा क़दम उठाए जाने के लिए दोहा बैठक का आयोजन किया गया है, विरोध तेज़ हो गया है। तालिबान का विरोध करने वाले अफ़ग़ानी नागरिकों को डर है कि अगर तालिबान को मान्यता मिल जाती है तो वह खुलकर लोगों पर अत्याचार करेंगे और पहले से भी ज़्यादा मानवाधिकारों का हनन करेंगे। दूसरे यह कि फिर इस देश में राजनीतिक और सामाजिक सुधारों का मुद्दा हमेशा के लिए ठंडे बस्ते में चला जाएगा और विश्व समुदाय इस पिछड़े हुए देश को भुला देगा।
जैसा कि देखा जा सकता है कि तालिबान के नेतृत्व में अफ़ग़ानिस्तान के लोगों और सत्तारूढ़ गुट की दोहा बैठक से अलग-अलग अपेक्षाएं हैं। एक तरफ़ तालिबान को इस बैठक से अपनी मान्यता प्राप्त करने की उम्मीद करता है, तो वहीं आम नागरिक विशेष रूप से महिलाएं उम्मीद करती हैं कि दोहा की बैठक तालिबान को मानवाधिकारों का सम्मान करने के लिए बाध्य करेगी।
अफ़ग़ानिस्तान के मामलों में ईरानी राष्ट्रपति के विशेष दूत हसन काज़मी क़ुम्मी इस संबंध में ईरान के दृष्टिकोण को बयान करते हुए कहते हैं कि इस सम्मेलन में ईरान निष्पक्ष दृष्टिकोण अपनाएगा, ताकि अफ़ग़ान राष्ट्र और नागरिकों के हितों की रक्षा की जा सके।