ब्रिक्स और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर नई मोर्चाबंदी
विकासशील देशों के संगठन ब्रिक्स में छह देशों के शामिल होने के बाद अब 11 सदस्यों वाले इस संगठन से विश्व स्तर पर नई गोलबंदी के लक्षण दिखाई देने लगे हैं।
ब्रिक्स की 15वीं शिखर बैठक पिछले हफ़्ते दक्षिणी अफ़्रीक़ा के जोहानेसबर्ग में हुई। इस बैठक में ब्रिक्स के सदस्य देशों रूस, चीन, ब्राज़ील, भारत और दक्षिणी अफ़्रीक़ा ने नए सदस्यों ईरान, अर्जेंटीना, सऊदी अरब, मिस्र, इमारात और इथोपिया की सदस्यता की स्वीकृति दीं वर्ष 2024 शुरू होते ही यह छह देश ब्रिक्स के औपचारिक सदस्य बन जाएंगे। नए देशों के शामिल होने के बाद अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ब्रिक्स की पोज़ीशन के बारे में अलग अलग समीक्षाएं आ रही हैं।
एक समीक्षा यह है कि छह देशों के शामिल होने क बाद जिनमें हरेक का अलग आर्थिक व राजनैतिक महत्व है, ब्रिक्स अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पोल बन सकता है। इस नज़रिए की वजह यह है कि ब्रिक्स के पुराने और नए सदस्यों की विश्व अर्थ व्यवस्था में बड़ी अहम भागीदारी है और दूसरी तरफ़ यह देश विश्व व्यवस्था में एकपक्षीयवाद के विरोधी हैं। ब्राज़ील की एफ़जीवी डायरीटो एसपी युनिवर्सिटी में इंटरनेशनल ला के विशेषज्ञ सालिम नासिर कहते हैं कि ब्रिक्स में सदस्यता के आवेदनों को देखकर लगता है कि विश्व स्तर पर शक्ति का संतुलन लगातार बदल रहा है। ब्रिक्स राजनैतिक और आर्थिक ताक़त का नया ध्रुव है जो अमरीका के वर्चस्व को चुनौती दे रहा है। तुर्किए के विशेषज्ञ महमत अली गुलेलर का कहना है कि ब्रिक्स नई विश्व व्यवस्था का बहुत महत्वपूर्ण स्तंभ है और यह अमरीका की राजनैतिक और ऊर्जा जंग पर बहुत बड़ा वार है।
दूसरा विषय यह है कि ब्रिक्स के सदस्य अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बड़े आर्थिक निर्णय ले सकते हैं। उनका ऊर्जा के क्षेत्र पर भी काफ़ी असर रहेगा क्योंकि सऊदी अरब, रूस, ईरान और इमारात दुनिया में बड़े तेल उत्पादक देशों में गिने जाते हैं। ऊर्जा के क्षेत्र मं इन देशों का आपसी समन्वय पश्चिमी देशों के लिए चुनौती बन सकता है और उनकी अर्थ व्यवस्थाओं को प्रभावित कर सकता है। ब्रिक्स के विस्तार के बाद इस विश्व निर्यात में इस संगठन की भागीदारी 20.2 प्रतिशत से बढ़कर 25.1 प्रतिशत हो जाएगी। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष 2050 तक ब्रिक्स देशों की अर्थ व्यवस्था दुनिया की सबसे बड़ी अर्थ व्यवस्थाओं का मुक़ाबला करने की स्थिति में होगी।
एक और महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि ब्रिक्स संगठन जी-7 का मुक़ाबला कर सकता है जिसमें अमरीका, कनाडा, फ़्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और ब्रिटेन शामिल हैं। रूस की समाचार एजेंसी ने अपनी समीक्षा में लिखा कि विस्तार के बाद ब्रिक्स की जीडीपी क्रय शक्ति के पहलू से बहुत ज़्यादा बढ़ जाएगी। अब इन देशों की जीडीपी 31.5 से बढ़कर 37 प्रतिशत हो जाएगी। जी-7 की बात की जाए तो इस समय उनकी संयुक्त जीडीपी 29.9 प्रतिशत है। ब्रिक्स देशों की आबादी 3 अरब 60 करोड़ा है जो दुनिया की कुल आबादी का 45 प्रतशित भाग है।
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