सुपर पावर के बजाए सुपर क़र्ज़दार अमरीका
अमरीकी सरकार का क़र्ज़ा छह महीने के भीतर 2.6 ट्रिलियन डालर बढ़ गया है और क़र्ज़ की कुल रक़म बढ़कर 33.8 ट्रिलियन डालर तक जा पहुंची है।
सुपर पावर होने का अमरीका का दावा तो अब दावा ही रह गया है लेकिन यह हक़ीक़त बहुत से देशों के लिए चिंता का विषय है कि भयानक रूप से क़र्ज़ में डूबा अमरीका किसी मोड़ पर पहुंच कर दुनिया के दूसरे देशों को भी भारी आर्थिक नुक़सान पहुंचा सकता है।
अमरीकी वित्त मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि टैक्स में कटौती, आर्थिक पैकेज दिए जाने और सरकार के ख़र्चे बढ़ने जैसे कारणों से अमरीका का क़र्ज़ा इतना बढ़ गया है।
रिपब्लिकन सांसद जान जेम्ज़ ने पिछले हफ़्ते कहा कि नेशनल क़र्ज़ की बात करें तो यह प्रति व्यक्ति एक लाख डालर से अधिक हो का है यह स्थिति संभावित रूप से वाइट हाउस के लिए यह संदेश रखती है कि फ़ेडरल सरकार के ख़र्चे ब्वाइलिंग प्वाइंट पर पहुंच चुके हैं।
बैंक आफ़ अमेरिका का कहना है कि अगले दशक में अमरीका के कर्ज़े में 20 ट्रिलियिन डालर की वृद्धि हो सकती है और यह 2033 में लगभग 54 ट्रिलियन डालर हो सकता है।
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