सऊदी अरब और क़तर को हथियारों की बिक्री की आलोचना
जर्मनी में शांति व सुरक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली अहम संस्थाओं ने सरकार की विदेश व सुरक्षा नीति की कड़ी आलोचना की है।
स्पीगल की रिपोर्ट के अनुसार हैमबर्ग विश्व विद्यालय में शांति व सुरक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान करने वाले इंस्टीट्यूट की मार्ग्रेट यूहानसन ने कहा जर्मनी द्वारा सऊदी अरब जैसे देशों को हथियार देना एक बड़ी बदनामी है। जर्मनी के अंतर्राष्ट्रीय केंद्र के मैक्स मोश्लर ने भी कहा है कि जर्मनी द्वारा अरब देशों को दिए जाने वाले हथियारों में कमी आई है लेकिन वह अब भी सऊदी अरब को युद्धक विमानों के कल पुर्ज़े दे रहा है जिन्हें वह यमन युद्ध में प्रयोग कर रहा है। इस रिपोर्ट के अनुसार जर्मनी में शांति व सुरक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली अहम संस्थाओं ने शरणार्थियों के संबंध में भी सरकार की नीतियों की आलोचना की है।
सऊदी अरब व क़तर सहित फ़ार्स की खाड़ी के तटवर्ती अरब देश को शस्त्रों का निर्यात मानवाधिकार और आतंकवाद के संबंध में यूरोपीय सरकारों की दोहरी नीति का सूचक है। अब दुनिया में किसी को भी अरब देशों विशेष कर सऊदी अरब की हिंसा, चरमपंथ व आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली नीतियों के बारे में संदेह नहीं रह गया है। सीरिया में दो करोड़ से अधिक लोगों को आले सऊद की युद्ध प्रेमी नीतियों के कारण विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना है। सीरिया में आतंकी गुटों को आर्थिक व सामरिक सहायता देने वालों में सऊदी अरब सबसे आगे है। इसी तरह यमन में भी दो करोड़ से अधिक लोग एक साल से अधिक समय से सऊदी अरब के युद्धक विमानों की बमबारी के कारण अत्यंत दयनीय जीवन बिता रहे हैं। इस देश का आधारभूत ढांचा पूरी तरह से तबाह हो गया है और हज़ारों बच्चे, महिलाएं और आम नागरिक इन हवाई हमलों में मारे जा चुके हैं। खेद की बात है कि पश्चिमी देशों की सरकारें मानवाधिकार और शांति व सुरक्षा के लिए काम करने वाली संस्थाओं की आवाज़ भी नहीं सुन रही हैं और मानवाधिकार व आतंकवाद के संबंध अपनी दोहरी नीतियों पर पुनर्विचार नहीं कर रही हैं। (HN)