दिन की व्याख्या | अमेरिकी श्रेष्ठता क्यों समाप्त हो रही है?
https://parstoday.ir/hi/news/world-i145366-दिन_की_व्याख्या_अमेरिकी_श्रेष्ठता_क्यों_समाप्त_हो_रही_है
पार्स टुडे – 'डेजर्ट स्टॉर्म' के तीन दशक बाद अमेरिकी रणनीतिक हलकों में यह मुद्दा उठ रहा है कि वाशिंगटन के निर्विवाद वर्चस्व का युग समाप्त हो गया है; ईरान के खिलाफ युद्ध ने शक्ति संतुलन में बदलाव और वैश्विक व्यवस्था में अमेरिकी प्रतिरोध की विश्वसनीयता के क्षरण की शुरुआत दिखाई है।
(last modified 2026-07-27T11:23:46+00:00 )
Jul २७, २०२६ १६:५१ Asia/Kolkata
  • दिन की व्याख्या | अमेरिकी श्रेष्ठता क्यों समाप्त हो रही है?

पार्स टुडे – 'डेजर्ट स्टॉर्म' के तीन दशक बाद अमेरिकी रणनीतिक हलकों में यह मुद्दा उठ रहा है कि वाशिंगटन के निर्विवाद वर्चस्व का युग समाप्त हो गया है; ईरान के खिलाफ युद्ध ने शक्ति संतुलन में बदलाव और वैश्विक व्यवस्था में अमेरिकी प्रतिरोध की विश्वसनीयता के क्षरण की शुरुआत दिखाई है।

'शक्ति, तब सबसे अधिक प्रभावी होती है, जब उसका उपयोग करने की आवश्यकता नहीं होती।' यह कथन वर्षों से शीत युद्ध के बाद की व्यवस्था में संयुक्त राज्य अमेरिका की स्थिति का वर्णन करता था। 1991 में फार्स की खाड़ी युद्ध में अमेरिकी त्वरित विजय ने दुनिया में इस धारणा को मजबूत किया कि, वाशिंगटन सीमित लागत के साथ अपनी राजनीतिक और सैन्य इच्छा को किसी भी अभिनेता पर थोप (तहमील) सकता है। लेकिन अब तीन दशक बाद यहाँ तक कि अमेरिकी रणनीतिक हलकों में भी यह सवाल उठाया गया है कि क्या वह युग समाप्त हो गया है? अमेरिकी पत्रिका 'फॉरेन अफेयर्स' ने एक विचारणीय विश्लेषण में ईरान पर अमेरिकी आक्रमण को वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव के एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में वर्णित किया है। इस पत्रिका के दृष्टिकोण से यह बदलाव एक सीमित युद्ध के परिणाम से अधिक शीत युद्ध के बाद के युग में युद्ध के नियमों में बदलाव और अमेरिकी सैन्य श्रेष्ठता के क्षरण को दर्शाता है।

 

1991 में 'डेजर्ट स्टॉर्म' ऑपरेशन को एक ऐतिहासिक घटना में बदलने वाली चीज़ केवल इराकी सेना की हार नहीं थी। इस युद्ध ने चार बुनियादी धारणाओं को सरकारों, बाजारों और अंतर्राष्ट्रीय अभिनेताओं के दिमाग में मजबूत किया। पहली धारणा अमेरिका आसानी से सैन्य परिणाम थोप सकता है। दूसरी धारणा , संघर्ष की तीव्रता के किसी भी स्तर पर, अमेरिका की बढ़त है। तीसरी धारणा , वह वैश्विक व्यापार के मार्गों की सुरक्षा की गारंटी करता है। और चौथी धारणा यह थी कि अमेरिकी शक्ति के खिलाफ प्रतिरोध एक बेकार लागत होगी। इसी धारणा ने एकध्रुवीय व्यवस्था की नींव और अमेरिकी नेतृत्व में वैश्विक विश्वास का गठन किया।

 

लेकिन ईरान युद्ध ने दिखाया कि ये पूर्वधारणाएँ अब अपनी पिछली विश्वसनीयता नहीं रखती हैं। क्षेत्र में अमेरिकी परिचालन सीमाएँ मोबाइल प्रणालियों सस्ते ड्रोनों और विकेन्द्रित नेटवर्कों का मुकाबला करने में कठिनाई  दिखाती है कि नई प्रौद्योगिकियाँ ने शक्ति के एकाधिकार को तोड़ दिया है। आज, सटीक युद्ध के साधन, कुछ शक्तियों के पास नहीं हैं। क्षेत्रीय अभिनेता भी उपलब्ध प्रौद्योगिकियों पर भरोसा करके महान शक्तियों पर भारी लागत थोप सकते हैं। mm