क्यूबा: कोलंबिया का संबंध तोड़ना, अमेरिका के प्रति दासता है
पार्सटुडे – क्यूबा सरकार ने कोलंबिया के निर्वाचित राष्ट्रपति द्वारा राजनयिक संबंध तोड़ने और हवाना में अपना दूतावास बंद करने की घोषणा को "दासता" और "अमेरिका की आक्रामक नीति के अनुपालन में एक क़दम" बताया है।
पार्सटुडे की रिपोर्ट के अनुसार क्यूबा के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कोलंबिया के राष्ट्रपति-निर्वाचित एबेलार्डो डे ला एस्प्रीया के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए ज़ोर देकर कहा कि यह रुख और बयान "क्यूबा और कोलंबिया के बीच ऐतिहासिक मैत्री और भाईचारे के संबंधों से दूर है।"
हवाना (क्यूबा की राजधानी) ने घोषणा की कि यह निर्णय "न तो कोई मामूली औचित्य रखता है और न ही कोलंबिया के राष्ट्रीय हितों के अनुकूल है" और यह "संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा हमारे राष्ट्रों के बीच हमेशा बढ़ावा दी जाने वाली विभाजनकारी और टकराव वाली नीति के प्रति कोलंबिया की भविष्य की सरकार की स्पष्ट अधीनता" को उजागर करता है।
इस आधिकारिक बयान में आगे कहा गया है:
"क्यूबा जानता है कि यह शत्रुतापूर्ण और निराधार कार्रवाई भाईचारे वाले कोलंबियाई राष्ट्र की भावनाओं को प्रतिबिंबित नहीं करती है; एक ऐसा राष्ट्र, जिसका हमने दशकों से शांति प्राप्त करने और उसके आंतरिक सशस्त्र संघर्ष के लिए बातचीत के माध्यम से राजनीतिक समाधान के लिए अथक समर्थन किया है।"
कोलंबिया के निर्वाचित राष्ट्रपति ने पिछले रविवार को घोषणा की थी कि वह कम से कम 14 दूतावास बंद करेंगे, जिनमें क्यूबा, हैती और निकारागुआ के दूतावास शामिल हैं – यह कदम आगामी 7 अगस्त को उनकी सरकार के कार्यभार संभालने के बाद राजनयिक नेटवर्क के पुनर्गठन का हिस्सा होगा।
डे ला एस्प्रीया ने ज़ोर देकर कहा कि इन कदमों का मतलब संबंधित देशों के साथ "राजनयिक संबंध तोड़ना" नहीं है, सिवाय क्यूबा और निकारागुआ के, जिनके बारे में उन्होंने कहा कि "अधिनायकवादी सरकारों के साथ कोई संबंध नहीं रखा जाएगा।"
कोलंबिया के भावी राष्ट्रपति के बयान ऐसे समय में आए हैं जब वाशिंगटन और हवाना के बीच तनाव जनवरी के बाद से अपने सबसे खराब स्तर पर पहुँच गया है – जब अमेरिका ने इस द्वीप पर तेल नाकाबंदी लागू की और फिर क्यूबा सरकार के साथ संबंध रखने वाली विदेशी कंपनियों के ख़िलाफ़ और अधिक प्रतिबंध लगाए। mm