ईरान नहीं बल्कि ट्रंप युद्ध से डरते हैंः न्यूयॉर्क टाइम्स
न्यूयॉर्क टाइम्स अख़बार ने ईरान के खिलाफ़ युद्ध में अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में अमेरिका की असमर्थता का ज़िक्र करते हुए लिखा कि तेहरान वाशिंगटन की सैन्य धमकियों के सामने अपने रुख पर कायम है और साथ ही संघर्ष के क्षेत्रीय परिणामों की चिंता ने अमेरिकी निर्णयों को प्रभावित किया है।
न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा कि जब डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर तेहरान पर सैन्य हमले से पीछे हटे तो उन्होंने वास्तव में दिखाया कि युद्ध से डरने वाला ईरान नहीं है बल्कि ट्रंप युद्ध से डरते हैं। तेहरान ने अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के समर्थन से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रतिष्ठानों और रणनीतिक जलमार्गों को खतरे में डालने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है।
इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप में ईरान परियोजना के निदेशक अली वाएज़ ने 17 जुलाई को जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले को हालिया घटनाक्रमों का एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया और कहा कि इस हमले ने दिखाया कि ईरान का मिसाइल शस्त्रागार अभी भी महत्वपूर्ण क्षमता रखता है और तेहरान की खुफिया क्षमता पहले की कल्पना से कहीं अधिक है। वाएज़ के अनुसार, ईरान की समग्र रणनीति अमेरिका को यह संदेश देने पर आधारित रही है कि यदि तनाव का एक नया दौर शुरू होता है तो ईरान की प्रतिक्रिया का दायरा और तीव्रता कहीं अधिक विनाशकारी होगी और इसके परिणाम न केवल क्षेत्र को बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करेंगे।
तेहरान विश्वविद्यालय में ईरानी अध्ययन के प्रोफेसर सासन करीमी ने भी न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि ईरानी अधिकारियों ने वार्ता प्रबंधन में ट्रंप के व्यवहार में एक स्पष्ट पैटर्न देखा है, और जब भी दोनों पक्षों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान होता है, ट्रंप ईरान को धमकी देकर अधिक रियायतें प्राप्त करने के लिए वार्ता के माहौल पर दबाव बनाने का प्रयास करते हैं लेकिन ईरान इतनी आसानी से ऐसे दबावों से प्रभावित नहीं होता है।
न्यूयॉर्क टाइम्स ने आगे अमेरिकी गोला-बारूद के भंडार में कमी का ज़िक्र करते हुए, हथियारों की कमी विशेष रूप से पैट्रियट मिसाइलों जैसी रक्षा प्रणालियों के बारे में इस देश के सैन्य अधिकारियों की चेतावनी का उल्लेख किया, जो भविष्य के संघर्षों में प्रवेश करने की इस देश की क्षमता को प्रभावित कर सकती है। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ट्रंप ने कभी भी इस्लामिक गणराज्य ईरान की प्रेरणाओं की पूरी समझ नहीं रखी और हमेशा इस वास्तविकता को नज़रअंदाज़ किया कि ईरान दबाव और धमकी के सामने पीछे नहीं हटता। mm