शंघाई सहयोग संगठन का सोलहवां शिखर सम्मेलन संपन्न
उज़्बेकिस्तान की राजधानी ताशक़न्द में शंघाई सहयोग संगठन के सदस्य देशों का सोलहवां शिखर सम्मेलन शुक्रवार को संपन्न हुआ।
इस संगठन के सदस्य देशों का सामयिक शिखर सम्मेलन, इस संगठन के आगामी उपायों व नीतियों की समीक्षा के उद्देश्य से आयोजित होता है और यह आपस में सहयोग के विस्तार के लिए सदस्य देशों के नेताओं के लिए द्विपक्षीय व बहुपक्षीय बातचीत का अवसर समझी जाती है। शंघाई सहयोग संगठन का सोलहवां शिखर सम्मेलन भी इससे अपवाद नहीं था।
इस बीच शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में चीन की ओर से पेश सुझाव, सदस्य देशों के बीच एकता को मज़बूत करने के लिए बहुत अहम समझे जा रहे हैं।
चीनी राष्ट्रपति शी जिन पिंग ने 5 अनुच्छेद पर आधारित सुझव रखा है जिसका लक्ष्य सदस्य देशों के बीच एकता मज़बूत करना और आपस में पारस्परिक सहयोग बढ़ाना है। इसी प्रकार मौजूदा अंतर्राष्ट्रीय हालात में सदस्य देशों के बीच विश्वास बढ़ाना भी इसका लक्ष्य है।
शायद चीन की ओर से इस सुझाव का कारण पूर्वी एशिया के देशों में बढ़ता तनाव और इस क्षेत्र के समीकरण में अमरीका की राजनैतिक व सैन्य उपस्थिति है।
रूस ने चीन के सुझाव का इसलिए स्वागत किया क्योंकि उसे यूक्रेन के समीकरण और सीरिया सहित मध्यपूर्व के हालात में शंघाई सहयोग संगठन का समर्थन चाहिए।
चीनी राष्ट्रपति ने शंघाई सहयोग संगठन के सदस्य देशों के बीच विश्वास व एकता को मज़बूत बनाने का सुझाव इसलिए दिया है क्योंकि इस संगठन में शामिल कुछ देश चीन के साथ राजनैतिक व आर्थिक प्रतिस्पर्धा के साथ साथ आपस में एक दूसरे से राजनैतिक व ऐतिहासिक मतभेद रखते हैं, इसलिए इस बात की चिंता पायी जाती है कि इन देशों के आपसी मदभेद का असर शंघाई सहयोग संगठन के सदस्य देशों के बीच आपसी सहयोग पर पड़ेगा। (MAQ/T)