आतंकी गुटों में बच्चों को शामिल करने पर यूनीसेफ़ की चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र संघ के बाल कोष यूनीसेफ़ ने कहा है कि दक्षिणी सूडान में 16 हज़ार से अधिक बच्चों को सशस्त्र गुटों में शामिल किया गया है।
यूनीसेफ़ के उप कार्यकारी निदेशक जस्टिन फ़ोरसेट ने इस बारे में सचेत करते हुए कहा है कि जारी वर्ष में अब तक साढ़े छः सौ से अधिक बच्चे छापामार गुटों में शामिल हुए हैं जबकि बड़ी संख्या में बच्चे युद्ध और सशस्त्र झड़पों के कारण बेघर हो गए हैं। दक्षिणी सूडान काफ़ी समय से गृह युद्ध में ग्रस्त है जिसमें बड़ी संख्या में लोग हताहत और घायल हो चुके हैं। टीकाकारों का कहना है कि इस दौरान बच्चों को सबसे अधिक नुक़सान पहुंचा है। सशस्त्र गुटों ने बहुत से बच्चों का अपहरण कर लिया है और उन्हें सैन्य कार्यवाहियों में लगा दिया गया है या फिर उनका यौन शोषण किया गया है। केवल दक्षिणी सूडान में ही नहीं बल्कि संसार के बहुत से देशों में झड़पों व गृह युद्धों के कारण बच्चों को सबसे अधिक नुक़सान उठाना पड़ा है।
यद्यपि संयुक्त राष्ट्र संघ और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने, जो बाल अधिकारों के क्षेत्र में काम करते हैं, बल देकर इस बात की मांग की है कि बच्चों को सैन्य लक्ष्यों के लए इस्तेमाल करने की प्रक्रिया को रोकने के लिए विश्व स्तर पर तुरंत क़दम उठाया जाए। इस संगठनों ने सभी संघर्षरत गुटों से अपील की है कि वे इस संबंध में अंतर्राष्ट्रीय क़ानूनों के अनुसार काम करें लेकिन इसे बावजूद बहुत से संघर्षरत देशों में बच्चों की कठिनाइयां यथावत जारी हैं। एेसा प्रतीत होता है कि वर्तमान परिस्थितियों के दृष्टिगत, अंतर्राष्ट्रीय सिफ़ारिशों से आगे बढ़ कर व्यवहारिक क़दम उठाया जाना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि विश्व शांति की स्थापना और आंतरिक व अंतर्राष्ट्रीय विवादों के निपटारे के लिए विश्व स्तर पर प्रयास होने चाहिए। इसी स्थिति में बच्चे एक शांत व सुरक्षित वातावरण में अच्छा जीवन बिता सकते हैं। (HN)