तुर्की और रूस के संबंधों में जमी बर्फ पिघलने लगी है
रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतीन ने 10 अक्तूबर को इस्तांबोल में तुर्की के अपने समकक्ष रजब तय्यब अर्दोग़ान से भेंटवार्ता की।
व्लादीमीर पुतीन ऊर्जा के संबंध में होने वाली अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेन्स में भाग लेने के लिए तुर्की गये थे। पहले घोषणा की गयी थी कि दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्ष क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषकर सीरिया और इसी प्रकार अंकारा और मॉस्को के संबंधों को सामान्य बनाने के बारे में भी विचारों का आदान– प्रदान करेंगे।
कुछ राजनीतिक हल्कों ने पुतीन की तुर्की यात्रा को रूस और तुर्की के संबंधों को बेहतर बनाये जाने की दिशा में नया क़दम बताया है।
दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के मध्य वार्ता विशेषकर दोनों नेताओं के मध्य होने वाले समझौते इस बात के सूचक हैं कि ऊर्जा के संबंध में होने वाली अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेन्स उन संबंधों को बेहतर व मजबूत करने की दिशा में एक अवसर है जिसे संबंधों को बेहतर बनाने के लिए काफी समय पहले अंजाम दिया गया था।
रूसी राष्ट्रपति की तुर्की यात्रा ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ तुर्की के संबंधों में बर्फ जमती जा रही है और कहा जा रहा है कि पुतीन की यह यात्रा ऐसे समय में हुई है कि जब क्षेत्र के कुछ मामलों के संबंध में अंकारा और मॉस्को के मध्य बहुत मतभेद हैं। जिन मामलों को लेकर रूस और तुर्की के मध्य मतभेद हैं उनमें से एक सीरिया में होने वाले परिवर्तनों के संबंध में तुर्की और सऊदी अरब के मध्य सहकारिता में वृद्धि है।
दूसरी ओर मॉस्को और अंकारा आर्थिक अवसरों की अनदेखी करना नहीं चाहते हैं। दूसरे शब्दों में आर्थिक अवसर वह एकमात्र कारण है जिसने तुर्की और रूस दोनों को एक दूसरे के साथ सहकारिता के प्रेरित किया है।
तुर्की में परमाणु संयंत्र बनाने और टर्क –स्ट्रीम प्राकृतिक गैस योजना को व्यवहारिक बनाये जाने पर आधारित रजब तय्यब अर्दोग़ान के बयान को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है। MM