लंदन में बहरैनी शासक की कार को रोकने की कोशिश
बहरैन के शासक हमद बिन ईसा आले ख़लीफ़ा को लंदन में आक्रोषित जनता के प्रदर्शन का सामना करना पड़ा।
ये लोग सत्ताधारी आल ख़लीफ़ा शासन की, फ़ार्स खाड़ी के इस राजशाही शासन में विरोधी स्वर को दबाने के कारण आलोचना कर रहे थे। बुधवार को बहरैनी शासक के ब्रितानी प्रधान मंत्री ट्रेसा मे से मिलने के लिए लंदन पहुंचते ही प्रदर्शन फूट पड़ा।
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने बहरैनी शासन के ख़िलाफ़ नारे लगाए और मनामा शासन के ख़िलाफ़ मानवाधिकार के उल्लंघन के मामलों की जांच शुरु करने की मांग की। कुछ लोगों ने इतना साहस दिखाया कि वे डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर बहरैनी शासक को ले जा रही कार के सामने खड़े हो गए। रैली के दौरान लंदन पुलिस ने दो मशहूर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार कर लिया। सई अलअवीदी ने द मिडिल ईस्ट आयी से इंटर्व्यू में कहा कि पुलिस को बहरैन में शासन की ओर से दी गयी यातनाओं के बारे में सुनने में आ रहे आरोपों की जांच करनी चाहिए, न कि कार्यकर्ताओं या पत्रकारों की गिरफ़्तारी।
अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ‘रिप्रीव’ ने भी बहरैनी शासक के लंदन दौरे पर चिंता जतायी है क्योंकि यह दौरा, बहरैन में सरकार की ओर से दी गयी यातनाओं के सुबूत को मिटाने में ब्रिटेन की ओर से की जा रही मदद के बारे में आने वाली रिपोर्टों के एक हफ़्ते बाद हो रहा है।(MAQ/N)