म्यांमार के 150 मुसलमान मारे गये
म्यांमार की सरकार ने हालिया कुछ दिनों की हिंसा के दौरान लगभग 70 रोहिंग्या मुसलमानों और 17 सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि की है।
अरैकन रोहिंग्या राष्ट्रीय संगठन ने घोषणा की है कि पिछले पांच दिनों के दौरान म्यांमार के पश्चिम में स्थित राखीन प्रांत में इस देश के सैनिकों के हाथों कम से कम 150 मुसलमान मारे गये।
लंदन में स्थित इस संगठन के एक वरिष्ठ जिम्मेदार कोकोलिन ने कहा कि म्यांमार की सरकार राखीन प्रांत में प्रत्रकारों और इसी प्रकार राहत पहुंचने वाले गुटों के प्रवेश को रोक कर मुसलमानों की हत्या को छिपाना चाहती है।
म्यांमार की सरकार ने हालिया कुछ दिनों की हिंसा के दौरान लगभग 70 रोहिंग्या मुसलमानों और 17 सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि की है।
म्यांमार के राखीन प्रांत में रोहिंग्या मुसलमानों के विरुद्ध हिंसा का नया दौर पिछले नौ अक्तूबर से और कई सीमावर्ती चौकियों पर सशस्त्र व्यक्तियों के हमलों के बहाने सेना द्वारा आरंभ हुई है और वह अब भी जारी है।
म्यांमार की सेना का कहना है कि इन हमलों में रोहिंग्या मुसलमानों का हाथ है और इसी कारण वह राखीन प्रांत में मुसलमानों के घर 2 की तलाशी ले रही है।
म्यांमार की सेना द्वारा राखीन प्रांत में विस्तृत पैमाने पर मुसलमानों की हत्या व हिंसा के कार्यक्रम का जारी रहना सैकड़ों मुसलमानों के बांग्लादेश भाग जाने का कारण बना है।
म्यांमार में मुसलमानों के विरुद्ध व्यापक पैमाने पर हिंसा ऐसी स्थिति में जारी है जब सुरक्षा परिषद सहित अंतरराष्ट्रीय संगठनों व संस्थाओं ने राखीन प्रांत में मुसलमानों की हत्या, महिलाओं से बलात्कार और उनके घरों में आग लगाये जाने पर मौन धारण कर रखा है।
म्यांमार की सरकार द्वारा राखीन प्रांत में पत्रकारों और राहत कर्मी गुटों की उपस्थिति का विरोध इस बात का सूचक है कि म्यांमार की सरकार इस देश के हिंसाग्रस्त क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय कानूनों के प्रति कटिबद्ध नहीं है।
आम तौर पर यह होता है कि जिस देश में युद्ध व हिंसा होती है वहां के युद्धरत पक्ष संकटग्रस्त क्षेत्रों में पत्रकारों और राहत दलों को जाने की अनुमति देते हैं परंतु यांगून, राखीन प्रांत में इस बात को स्वीकार नहीं कर रहा है जो इस बात का सूचक है कि म्यांमार की सरकार राखीन प्रांत में रोहिंग्या मुसलमानों की विषम स्थिति को विश्व जनमत तक नहीं पहुंचने देना चाहती। MM