साम्राज्य विरोधी नायक फीडल कास्ट्रो अब इस दुनिया में नहीं रहे
फीडल कास्त्रो को लैटिन अमेरिका में साम्राज्यवादी व्यवस्था के विरुद्ध संघर्षकर्ता करने का प्रतीक समझा जाता है।
क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति और इस देश के क्रांतिकारी नेता फीडल कास्त्रो का 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। फीडल कास्त्रो क्यूबा के नेता होने के अलावा वर्ष 1959 से 1976 तक इस देश के प्रधानमंत्री थे जबकि 1976 से 2008 तक वह क्यूबा के राष्ट्रपति थे। फीडल कास्त्रो को लैटिन अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेषकर शीतयुद्ध के दौरान की महत्वपूर्ण हस्ती का नाम दिया जाता है।
फीडल कास्त्रो के नेतृत्व में क्यूबा की राष्ट्रीय क्रांति वर्ष 1959 में सफल हुई थी पंरतु उसके बाद क्यूबा की नव गठित सरकार को अमेरिका की निरंतर शत्रुतापूर्ण कार्यवाहियों का सामना रहा। फीडल कास्त्रो को लैटिन अमेरिका में साम्राज्यवादी व्यवस्था के विरुद्ध संघर्षकर्ता करने का प्रतीक समझा जाता है।
फीडल कास्त्रो के सत्ताकाल में क्यूबा के विभिन्न क्षेत्रों में ध्यान योग्य सुधार व प्रगति हुई। जैसे शिक्षा को निःशुल्क किया गया। चिकित्सा सेवाओं को सार्वजनिक और बेहतर किया गया जिसका परिणाम यह हुआ कि क्यूबा इन दोनों क्षेत्रों में विश्व के अच्छे देशों की पंक्ति में शामिल हो गया।
फीडल कास्त्रो के पूरे सत्ताकाल में क्यूबा को अमेरिका की शत्रुतापूर्ण कार्यवाहियों एवं दुप्रचारों का सामना रहा। फीडल कास्त्रो के नेतृत्व में क्यूबा की क्रांति के सफल होने के बाद अमेरिका ने सदैव क्यूबा के प्रति शत्रुतापूर्ण रवइया अपनाया और उसके विरुद्ध कड़ा आर्थिक प्रतिबंध लगा दिया। क्यूबा के विरुद्ध अमेरिका ने जो आर्थिक, व्यापारिक और वित्तीय प्रतिबंध वर्ष 1960 से लगाया था वह अब भी जारी है।
अमेरिका ने क्यूबा के विरुद्ध जो अन्यायपूर्ण प्रतिबंध लगाया था उस पर विश्व स्तर पर सवाल उठाये जाते रहे और संयुक्त राष्ट्रसंघ की महासभा में बारमबार प्रस्ताव पारित करके उसके विरुद्ध प्रतिबंधों की समाप्ति की मांग की गयी। हवाना के विरुद्ध अमेरिकी प्रतिबंध और उनसे मुकाबला फीडल कास्त्रो की मूल चिंता थी।
हवाना के अधिकारियों के अनुसार अमेरिकी प्रतिबंधों से जो मानवीय क्षति पहुंची है किसी चीज़ से उसकी तुलना नहीं की जा सकती। इन प्रतिबंधों से क्यूबा की जनता को अनगिनत समस्याओं का सामना करना पड़ा।
बहरहाल फीडल कास्त्रो क्यूबा के ऐसे नेता थे जो दो बार गुट निरपेक्ष आंदोलन के अध्यक्ष भी रह चुके हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है और उनके समर्थक उन्हें साम्रराज्य विरोधी नायक के रूप में देखते व मानते हैं। MM