अमरीका, मस्जिदों को मिले धमकी भरे पत्र, मुसलमानों में भय व्याप्त
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अमरीकी राज्य कैलीफ़ोर्निया में स्थित तीन मस्जिदों को धमकी भरे पत्र मिलने के बाद नागरिक अधिकारों के संगठ ने मस्जिद के बाहर पुलिस बल की संख्या में वृद्धि की मांग की है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Nov २८, २०१६ ०४:३० Asia/Kolkata
  • अमरीका, मस्जिदों को मिले धमकी भरे पत्र, मुसलमानों में भय व्याप्त

अमरीकी राज्य कैलीफ़ोर्निया में स्थित तीन मस्जिदों को धमकी भरे पत्र मिलने के बाद नागरिक अधिकारों के संगठ ने मस्जिद के बाहर पुलिस बल की संख्या में वृद्धि की मांग की है।

अमरीकी समाचार एजेन्सी एसोशिएटेड प्रेस के अनुसार कैलीफ़ोर्निया की कई मस्जिदों को हाथ से लिखे हुए पत्र मिले हैं जिनमें नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की प्रशंसा की गयी है और मुस्लमानों को जातीय सफ़ाए की धमकी दी गयी है। लास एंजलस टाइम्स के अनुसार, अमरीकी इस्लामी संबंध परिषद सीएआईआर का कहना है कि हाथ से लिखे हुए फ़ोटो काफी हुए पत्र पिछले सप्ताह इस्लामिक सेन्टर आफ़ लांग बीच, इस्लामिक सेन्टर आफ़ किलियर मोन्ट और एवरग्रीन इस्लामिक सेन्टर सेन्ट जोज़ में भेजे गये।

पत्र में “शैतान की संतानों” को संबोधित किया गया था और उस पर “अमरीकन फ़ार ए बेटर वे” नारा दर्ज था। सीएआईआर का कहना है कि पत्र में लिखा है कि क्षेत्र में नया पुलिसवाला आ गया है जिसका नाम डोनल्ड ट्रंप है, वह अमरीका को साफ़ कर देगा और उसे दोबारा शानदार बनाएगा और वह इसकी शुरुआत तुम मुसलमानों से करेगा। पत्र में यह भी लिखा है कि “और वह तुम मुसलमानों से साथ वह करेगा जो हिटलर ने यहूदियों के साथ किया था”।

सीएआईआर लास एंजलस के एक्ज़ेकेटिव डायरेक्टर होसाम एयलूश ने कहा कि इन घृणित पत्रों के कारण लास एंजलस काउंटी में लोग दुखी हैं। उन्होंने कहा कि डोनल्ड ट्रंप के ग़ैर ज़िम्मेदाराना और घृणित चुनावी अभियान ने उनके स्वयं भू समर्थकों में घृणा, असहिष्णुता, और ओछेपन को हवा दी है। उन्होंने कहा कि मैं यह नहीं कह रहा हूं कि डोनल्ड ट्रंप ने नस्लभेदी लोगों को जन्म दिया है किन्तु उन्होंने इसे सामान्य बात अवश्य बनाई। होसाम एयलूश का कहना है कि ट्रंप कहते हैं कि वह इसके ज़िम्मेदार नहीं हैं और मैं उनका सम्मन करता हूं किन्तु मैं उन्हें याद दिलाना चाहता हूं कि अमरीकी राष्ट्रपति के रूप में वह हर अमरीका के साथ समान व्यवहार करें।

सेन जोज़ पुलिस विभाग के प्रवक्ता सारजेन्ट एनरिक गारशिया ने कहा कि पुलिस ने जांच पड़ताल आरंभ कर दी है और इस मामले को घृणा पर आधारित कार्यवाही घोषित किया गया है। ज्ञात रहे कि पिछले सप्ताह एफ़बीआई ने आंकड़े जारी किए थे जिसके अनुसार 2011 में घटने वाली नाईन इलेवन की घटना के बाद से 2015 में मुसलमानों के विरुद्ध घृणा पर आधारित अपराधों की संख्या सबसे अधिक रही। (AK)