ट्रम्पः अमरीका अखंड चीन की पॉलेसी से बंधा नहीं रह सकता
अमरीका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प का कहना है कि ज़रूरी नहीं है अमरीका, अखंड चीन पर आधारित लंबे समय से चली आ रही अपनी पॉलेसी पर जमा रहे।
ट्रम्प ने बीजिंग के कड़े विरोध की संभावना के बावजूद, ताइवान को चीन का हिस्सा मानने की अमरीका की क़रीब चार दशक पुरानी पॉलेसी पर सवाल उठाया है।
2 दिसम्बर को ताइवान के राष्ट्रपति से टेलीफ़ोन पर बातचीत के कारण, चीन की ओर से कूटनीतिक विरोध के बाद रविवार को फ़ॉक्स न्यूज़ से बात करते हुए ट्रम्प ने यह बयान दिया।
ट्रम्प का कहना है कि अखंड चीन की पॉलेसी को वह पूर्ण रूप से समझते हैं, लेकिन वाशिंग्टन को इससे बंधे रहने की क्या ज़रूरत है, लेकिन हां, अगर चीन अमरीका के साथ व्यापार समेत अन्य मामलों में सहमति तक पहुंचता है तो और बात है।
ताइवान का भविष्य चीन के लिए एक संवेदनशील मामला माना जाता है और बीजिंग ताइवान को अपना एक राज्य और अटूट भाग मानता है। 1979 में वाशिंगन और बीजिंग के बीच कूटनीतिक संबंधों के बाद, वाशिंग्टन के उच्च अधिकारियों ने ताइवान के साथ सीधा संपर्क बंद कर दिया। इसी कारण ट्रम्प के इस क़दम को इस परम्परा को तोड़ने वाला बताया जा रहा है।
इससे पहले भी चुनाव प्रचार के दौरान, ट्रम्प ने चीन की नीतियों को निशाना बनाया था और उसकी आलोचना की थी। ट्रम्प की आलोचनाओं का केन्द्र चीन की व्यापारिक नीतियां थीं। ट्रम्प का मानना है कि चीन ने अपनी व्यापारिक नीतियों के कारण, अमरीका समेत विश्व बाज़ार को अपने निंयत्रण में ले लिया है और दूसरे देशों के घरेलू उत्पादन को नष्ट कर दिया है, जिसके कारण लाखों नौकरियों का अवसर छीन लिया है।
यह ऐसी स्थिति में है कि जब बीजिंग का कहना है कि वह क्षेत्रीय मामलों में वाशिंग्टन को हस्तक्षेप की अनुमति नहीं देगा। चीनी अधिकारी वाशिंग्टन पर आरोप लगाते हैं कि मानवाधिकार और अन्य दूसरे मुद्दों को बहाना बनाकर वह अन्य देशों के मामलों में हस्तक्षेप का प्रयास करता है।
कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि अगर ट्रम्प की सरकार अखंड चीन की पॉलेसी के साथ कोई छेड़छाड़ करती है तो दोनों देशों के बीच तनाव में अभूतपूर्व वृद्धि हो जाएगी और दोनों देश प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से टकराव की स्थिति में आ सकते हैं।