मिस्र और क़तर के बीच बढ़ता तनाव
मिस्र के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी करके देश की राजधानी क़ाहिरा में कॉप्टिक ऑर्थोडॉक्स ईसाईयों के चर्च सेंट पीटर्स में आतंकवादी धमाके के लिए क़तर को ज़िम्मेदार ठहराया है।
11 दिसम्बर को सेंट पीटर्स चर्च में हुए एक बड़े धमाके में कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई और 30 से ज़्यादा घायल हो गए थे। हालांकि इस धमाके की ज़िम्मेदारी तकफ़ीरी आतंकवादी गुट दाइश ने ज़िम्मेदारी स्वीकार कर ली थी, लेकिन मिस्र की सरकार का मानना है कि इस आतंकवादी हमले में क़तर का हाथ है। इससे दोनों देशों के बीच पहले से जारी तनाव में अधिक वृद्धि हो गई है।
क़तर, मिस्र के अपदस्थ राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी और उनके संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड के कट्टर समर्थकों में से है, यही कारण है कि अब्दुल फ़त्ताह सीसी के नेतृत्व में सेना द्वारा मुर्सी की सरकार के तख़्तापलट के बाद दोनों देशों के रिश्तों में काफ़ी कड़वाहट देखने को मिल रही है।
सीसी सरकार ने कई बार फ़ार्स खाड़ी के इस छोटे से अरब देश पर देश के आतंकरिक मामलों में हस्तक्षेप का आरोप लगाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर अफ़्रीक़ी देशों और अरब देशों में शासन विरोधी जनांदोलन की लहर और मुस्लिम ब्रदरहुड के एक शक्तिशाली राजनीतिक विकल्प के रूप में उभरने से क़तर के अधिकारियों को यह आशा थी कि इससे इन देशों में उनका प्रभाव बढ़ेगा। लेकिन मिस्र में सत्ता हाथ में लेने के बावजूद मुस्लिम ब्रदरहुड को असफलता का मुंह देखना पड़ा, जिससे क्षेत्रीय स्तर पर क़तर बैक फ़ुट पर आ गया।
तेल और गैस से मालामाल होने के कारण, क़तर आर्थिक रूप से समृद्ध देश है और वह अपने पैट्रो डॉलरों को मिस्र, सीरिया, लीबिया और अन्य क्षेत्रीय देशों में प्रभाव के लिए इस्तेमाल करता है।
यहां महत्वपूर्ण यह है कि क़तर और मिस्र के बीच जारी तनाव अब बढ़कर फ़ार्स खाड़ी सहयोग परिषद तक पहुंच गया है। इसका एक प्रमुख कारण यह है कि सीसी के मिस्र में सत्ता संभालने के एक महीने के हनीमून के बाद मिस्र और सऊदी अरब के बीच रिश्तों में खटास आ गई थी। मिस्र ने औपचारिक रूप से एक बयान जारी करके सीरिया के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के लिए सऊदी अरब की आलोचना की थी। मिस्री सरकार अब खुलकर फ़ार्स खाड़ी सहयोग परिषद के सदस्य देशों के क्षेत्रीय देशों में हस्तक्षेप और दबाव का विरोध कर रही है।