म्यांमार में मुसलमानों पर अब पुलिस का क़हर + वीडियो
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म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों पर अत्याचार तो कई साल से जारी है और इस अत्याचार में बौद्ध मत के चरमपंथी शामिल हैं जबकि सरकार और सुरक्षा एजेंसियों पर भी आरोप लगते रहे हैं कि वह अपनी देख रेख में रोहिंग्या मुसलमानों पर हमले करवा रही हैं या फिर ख़ुद भी इन हमलों में शामिल हैं।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jan ०३, २०१७ १६:०६ Asia/Kolkata

म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों पर अत्याचार तो कई साल से जारी है और इस अत्याचार में बौद्ध मत के चरमपंथी शामिल हैं जबकि सरकार और सुरक्षा एजेंसियों पर भी आरोप लगते रहे हैं कि वह अपनी देख रेख में रोहिंग्या मुसलमानों पर हमले करवा रही हैं या फिर ख़ुद भी इन हमलों में शामिल हैं।

मगर सरकार इन आरोपों को ख़ारिज करती आई है लेकिन इसी बीच कुछ पुलिस कर्मियों की वीडियो मीडिया में जारी हो गई जिसमें वह रोहिंग्या मुसलमानों को बुरी तरह पीट रहे हैं।

वीडियो सार्वजनिक हो जाने के बाद प्रशासन कुछ पुलिसकर्मियों को गिरफ़तार करने पर मजबूर हो गया। यदि यह वीडियो मीडिया में न आती तो पुलिसकर्मियों की गिरफ़तारी की संभावना नहीं थी। यह वीडिया पांच नवंबर 2016 की है।

म्यांमार सरकार ने पुलिसकर्मियों की गिरफ़तारी की पुष्टि की है। म्यांमार में वर्ष 2009 के बाद से आन सान सूची की स्थिति मज़बूत हुई और देश में कुछ राजनैतिक बदलाव हुए लेकिन मुसलमानों पर अत्याचार का सिलसिला बंद नहीं हुआ। आन सान सूची इस समय विदेश मंत्री और सरकार की सलाहकार हैं जबकि वास्तव में सत्ता उन्हीं के हाथ में है। सूची को अधिकार मिलने के बाद यह आशा की जा रही थी कि रोहिंग्या मुसलमानों पर हो रहे अत्याचारों में कुछ कमी आएगी लेकिन एसा नहीं हुआ। बल्कि यहां तक कहा जा रहा है कि म्यांमार में मुसलमानों की पीड़ाओं में आन सान सूची की भी प्रभावी भूमिका है। मीडिया और अनेक गलियारों ने अब तक बार बार मुसलमानों पर हो रहे अत्याचारों को उठाया लेकिन सरकार ने बार बार रिपोर्टों को ख़ारिज कर दिया।

हालिया दिनों इंडोनेशिया और मलेशिया सहित आसेआन के देशों ने म्यांमार पर दबाव डाला है जिसके बाद इस देश की सरकार को यह आभास होने लगा है कि उसे जवाबदेह होना पड़ सकता है। पुलिसकर्मियों की गिरफ़तार भी शायद इसी दबाव का नतीजा है।