उत्तरी कोरिया ने भी अमेरिका की दोहरी नीति की आलोचना की
प्यूंगयांग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार अमेरिका की विनाशकारी और विस्तारवादी नीति का मुकाबला किया जाना चाहिये
विभिन्न देश अमेरिका की दोहरी नीति विशेषकर परमाणु मामले में उसकी नीति की आलोचना करते हैं। उत्तरी कोरिया ने भी अमेरिका की इस नीति की आलोचना की है और कहा है कि वाशिंग्टन उसका प्रयोग राजनीतिक लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए करता है।
प्यूंगयांग ने विश्व समुदाय से मांग की है कि वह उत्तरी कोरिया के संबंध में अमेरिका की दोहरी नीति का अनुसरण न करे क्योंकि यह नीति अपनाकर अमेरिका यह समझता है कि दूसरों को अधिकार नहीं है और वह अपने हितों की चेष्टा में है।
उत्तरी कोरिया ने अमेरिका के क्रिया-कलापों विशेषकर सैनिक क्षेत्रों और एशिया-पैसेफिक़ क्षेत्र के विस्तार पर जो आपत्ति जताई है उसका संबंध उत्तरी कोरिया के विरुद्ध अमेरिकी सैनिक धमकी से है। इस बात पर ध्यान दिये बिना कि अप्रचलित हथियारों के उत्पादन और उनमें विस्तार से एक देश की सुरक्षा सुनिश्चित होती है या नहीं? उत्तरी कोरिया अक्तूबर वर्ष 2006 से अब तक चार परमाणु बमों और एक हाइड्रोजन बम का परीक्षण कर चुका है। साथ ही प्यूंगयांग कम दूरी, मध्यम दूरी और लंबी दूरी तक मार करने वाले विभिन्न प्रकार के दसियों प्रक्षेपास्त्रों का भी परीक्षण कर चुका है।
इस बात की अनदेखी करते हुए कि ये परीक्षण सफल या असफल थे, उत्तरी कोरिया ने इन समस्त कार्यवाहियों व गतिविधियों को निरोधक बताया है।
क्योंकि प्यूंगयांग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार अमेरिका की विनाशकारी और विस्तारवादी नीति का मुकाबला किया जाना चाहिये और यह कार्य संभव नहीं है किन्तु यह कि विशेष हथियारों व सैनिक उपकरणों से लैस हुआ जाये।
सुरक्षा के बारे में तार्किक और सही निष्कर्ष आज की दुनिया में यह है कि कोई व्यक्ति, पार्टी या देश व सरकार परमाणु हथियारों से अपनी रक्षा नहीं करती है परंतु उत्तरी कोरिया का तर्क यह है कि अमेरिका विशिष्टतावादी है और वह एशिया में अपनी सैन्य शक्ति को मज़बूत बनाने के प्रयास में है।
क्योंकि दक्षिणी कोरिया में थाड प्रक्षेपास्त्रिक मिसाइल प्रणाली लगाने जाने का कोई कारण नहीं था। इसके अलावा दूसरे कई कारण हैं जिनकी वजह से उत्तरी कोरिया परमाणु निरोधक क्षमता पर बल देता है और अमेरिका तथा विश्व समुदाय की चेतावनी पर कोई ध्यान नहीं देता है। MM