प्रवासियों पर रोक और ट्रंप की चालाकियां
अमरीका की ट्रंप सरकार ने सात देशों के नागरिकों के अमरीका में प्रवेश पर रोक लगा दी। इनमें छह अरब देश हैं जबकि ईरान को भी इसी सूचि में शामिल किया गया है।
यह बात साफ़ है कि ट्रंप ने अपनी नस्लभेदी सोच तथा देश के भीतर नस्लभेदी गलियारों को संतुष्ट करने के लिए यह क़दम उठाया है। ट्रंप बात तो यह कह रहे हैं कि वह अपने देश के नागरिकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए यह क़दम उठा रहे हैं लेकिन आंकड़े बताते हैं कि हर साल 11 हज़ार अमरीकी नागरिक अपने ही देशवासियों के हाथों मारे जाते हैं विदेशों से अमरीका जाने वाले प्रवासियों के हाथों नहीं।
ट्रंप ने जिन देशों पर प्रतिबंध लगाया है उनमें से किसी भी देश का नागरिक अमरीका में होने वाले आतंकी हमले में लिप्त नहीं रहा। 11 सितम्बर को हुए आतंकी हमले में शामिल 19 हमलावरों में 15 सऊदी अरब के, 2 संयुक्त अरब इमारात के एक मिस्र का और एक लेबनान का नागरिक था। इस हमले के बाद अमरीका ने अफ़ग़ानिस्तान और इराक़ पर हमला कर दिया जिसके नतीजे में आतंकवाद की भारी लहर उठी।
एसा लगता है कि ट्रंप सरकार भी नाम आतंकवाद का ले रही है और क़दम कुछ और ही उठा रही है। वरना क्या वजह है कि ट्रंप सरकार ने उन देशों के नागरिकों पर प्रतिबंध नहीं लगाया है जहां के नागरिक 11 सितम्बर के हमले में लिप्त थे।
नए साल की पार्टी के अवसर पर ट्रंप ने समर्थकों की भीड़ में हुसैन सजवानी की ओर इशारा किया और कहा कि हुसैन और उनकी पूरा परिवार बहुत अच्छे लोग है।
सजवानी एक अरबपति व्यक्ति हैं जो दुबई में दो गोल्फ़ कोर्स में ट्रंप के साझेदार हैं।
ट्रंप ने चुनावी अबभियान के दौरान कहा था कि वह अमरीका में मुसलमानों क प्रवेश पर रोक लगाएंगे लेकिन जब रोक लगाई तो सात देशों पर। साथ ही ट्रंप कई मुस्लिम देशों में अपने व्यापारिक केन्द्र और इमारतें बना रहे हैं जिन पर उनका भी लिखा होता है। इस लिए कि उन्हें इन देशों में व्यापारिक लाभ मिल रहा है। ट्रंप के नाम का एक और गोल्फ़ कोर्स शीघ्र ही दुबई में खुलने वाला है। उन्होंने ट्रंप टावर में क़तर एयरवेज़ को किराए पर जगह दे रखी है। ट्रंप के डीसी होटल में बहरैन और कुवैत की सरकारों की ओर से आयोजन होते रहे हैं।
साफ़ ज़ाहिर है कि ट्रंप ने अपने समर्थकों को ख़ुश रखने के लिए कुछ देशों के नागरिकों पर प्रतिबंध लगा दिया है लेकिन इस बात का पूरा ध्यान रखा है कि उन्हें कोई व्यापारिक नुक़सान न हो।