डोनाल्ड ट्रंप और अंगेला मर्केल के बीच होने वाली भेंटवार्ता परिणामहीन
व्यापार, रक्षा, जलवायु और शरणार्थियों की समस्या सहित विभिन्न मामलों को लेकर जर्मनी और अमेरिका में मतभेद हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल ने 17 मार्च को वाशिंग्टन में एक दूसरे से भेंटवार्ता की।
इस भेंटवार्ता में दोनों पक्षों ने अपने पहले वाले दृष्टिकोणों पर बल दिया जिसके कारण वे आर्थिक, राजनीतिक, सुरक्षा और सामाजिक क्षेत्रों में अपने मतभेदों को कम न कर सके। व्यापार, रक्षा, जलवायु और शरणार्थियों की समस्या सहित विभिन्न मामलों को लेकर जर्मनी और अमेरिका में मतभेद हैं।
20 जनवरी वर्ष 2017 को डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका का राष्ट्रपति बन जाने और उसके बाद नैटो और यूरोपीय संघ के बारे में ट्रंप के बयान से अमेरिका और यूरोपीय संघ के संबंधों पर बहुत अधिक नकारात्मक प्रभाव पड़े हैं।
चूंकि जर्मन चांसलर अंगेला मर्केल शरणार्थियों के साथ व्यवहार के संबंध में नर्म पहलु रखती हैं और उनका मानना है कि शरणार्थियों को स्वीकार किया जाना चाहिये जबकि इस संबंध में ट्रंप की नीति इसके बिल्कुल विरुद्ध है और इस विषय को लेकर अमेरिका और जर्मनी के संबंधों में काफी कड़ुवाहट आ गयी है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि पलायन एक विशिष्टिता है न कि एक अधिकार। इस आधार पर उनके अनुसार अमेरिका और यूरोपीय देशों के नागरिकों की सुरक्षा बुनियादी प्राथमिकता व अधिकार है परंतु अंगेला मर्केल इस दृष्टिकोण की विरोधी हैं और उन्होंने ट्रंप के उस आदेश की आलोचना की है जिसमें उन्होंने 6 इस्लामी देशों के नागरिकों की अमेरिका यात्रा पर प्रतिबंध लगाया है।
इन मामलों के दृष्टिगत पहले से अपेक्षा की जा रही थी कि अमेरिकी राष्ट्रपति और जर्मन चांसलर की भेंटवार्ता मित्रतापूर्ण नहीं होगी।
साथ ही इस भेंटवार्ता से पहले जर्मन चांसलर अंगेला मर्केल ने कहा था कि वह अमेरिका के साथ न्यायपूर्ण लेनदेन चाहती हैं। ट्रंप व्यापारिक और आर्थिक क्षेत्रों में सीमाएं उत्पन्न करने के पक्षधर हैं और यह विषय जर्मन वासियों की चिंता बना है क्योंकि जर्मनी निर्मित वस्तुओं का निर्यात करने वाला यूरोपीय संघ का सबसे बड़ा देश है।
साथ ही वह यूरोपीय संघ का सबसे बड़ा आर्थिक व औद्योगिक देश है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संबंध में पाइ जाने वाली चिंता के उत्तर में कहा है कि वह व्यापार में जर्मनी को अलग- थलग नहीं करना चाहते हैं बल्कि वह चाहते हैं कि व्यापारिक नीति न्यायपूर्ण हो। MM