रोहिंग्या मुसलमान, बौद्ध पूंजीपतियों की साज़िश का निशाना बन रहे हैं
पाकिस्तान की मानवाधिकार कार्यकर्ता का कहना है कि रोहिंग्या मुसलमानों का मुद्दा पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा चैलेंज है चूंकि जितना अत्याचार वहां हुआ है, हमें दुनिया में कहीं दिखाई नहीं देता।
डाक्टर फ़रज़ाना बारी का कहना था कि रोहिंग्या मुसलमानों को कोई देश लेने को तैयार नहीं है, इस समय उनका कोई देश नहीं है, जहां सदियों से यह लोग रह रहे थे वहां से उन्हें निकाला जा रहा है। पाक मानवाधिकार कार्यकर्ता का कहना है कि यह मामला धर्म से अधिक मानवता का है, रोहिंग्या कम्युनिटी में हिंदु भी शामिल हैं, इस कम्युनिटी का सोचा समझा जनसंहार जारी है। डाक्टर फ़रज़ाना बारी काक हना है कि महत्वपूर्ण बात यह है कि राख़ीन का यह प्रांत प्राकृतिक संसाधनों से मालामाल है, बौद्ध पूंजीपतियों का प्रयास है कि इस क्षेत्र को ख़ाली कराया जाए और इस पर क़ब्ज़ा किया जाए।
उनका कहना था कि म्यांमार सरकार पर यदि दबाव डालना है तो यह किसी एक देश के बस की बात नहीं है, संयुक्त राष्ट्र संघ से म्यांमार के इन अत्याचारों के विरुद्ध प्रस्ताव पारित कराना होगा और वहां संयुक्त राष्ट्र संघ के शांति सैनिकों को तैनात करना होगा। डाक्टर फ़रज़ाना का कहना था कि जब तक संयुक्त राष्ट्र संघ और ओआईसी के प्लेटफ़ार्म से इस मुद्दे को उठाया नहीं जाएगा, इसका समाधान संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि रोहिंग्या जिस देश में जा रहे हैं वह देश उनको नागरिकता दे। (AK)