संयुक्त राष्ट्र संघ के ढांचे में सुधार की फिर उठी मांग
संयुक्त राष्ट्र संघ के 128 देशों के प्रतिनिधियों ने इस संघ के ढांचे में सुधार से संबंधित प्रस्ताव पर दस्तख़त किए हैं।
वास्तव में संयुक्त राष्ट्र संघ के ढांचे में सुधार इस सबसे बड़े अंतर्राष्ट्रीय संगठन की सबसे बड़ी चुनौती समझी जाती है। इस बात में शक नहीं कि संयुक्त राष्ट्र संघ के मौजूदा ढांचे में सुधार होना मौजूदा दौर में बहुत अहम है क्योंकि इसका ढांचा मौजूदा दुनिया की वास्तविकताओं के अनुरुप नहीं है। इस सयम अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था का ढांचा कई धुर्वीय व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में संयुक्त राष्ट्र संघ के ढांचे में सुधार और अंतर्राष्ट्रीय संकटों के हल में इस संगठन की भूमिका को बेहतर करने के लिए व्यापक प्रयास हुए, लेकिन सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने या वीटो अधिकार को ख़त्म करने जैसी मांग पर सभी देशों की सहमति नहीं बनी। इसी वजह से बहुत से देश ख़ास तौर पर जर्मनी और जापान जैसे औद्योगिक दृष्टि से विकसित देशों और भारत, ब्राज़ील और दक्षिण अफ़्रीक़ा जैसे आर्थिक दृष्टि से मज़बूत देश संयुक्त राष्ट्र संघ के ढांचे को दुनिया की मौजूदा वास्तविकताओं के अनुसार बनाने की मांग कर रहे हैं।
सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों को हासिल वीटो अधिकार वह विषय है जिस पर हमेशा से से आपत्ति जतायी जाती रही है। इसके अलावा सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यों पर आधारित संरचना भी दुनिया के ज़्यादा तर देशों को स्वीकार नहीं है क्योंकि सुरक्षा परिषद के मौजूदा ढांचे में कुछ महाद्वीपों जैसे अफ़्रीक़ा और दक्षिण अमरीका का कोई स्थायी सदस्य नहीं है। (MAQ/T)