यूरोप की ओर से जेसीपीओए को सुरक्षित रखने के प्रयास
अमरीकी राष्ट्रपति के क्रियाकलापों को देखते हुए यूरोप ने परमाणु समझौते, जेसीपीओए को सुरक्षित रखने के प्रयास कर दिये हैं।
डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से ईरान पर जेसीपीओए के प्रति कटिबद्ध न रहने के आरोप के साथ ही यूरोपीय देशों ने जेसीपीओए को सुरक्षित करने के लिए प्रयास तेज़ कर दिये हैं। यूरोप का प्रयास है कि परमाणु समझौते के बारे में अमरीकी राष्ट्रपति यदि उनकी मांग को अनेदखा कर देते हैं तो वे जेसीपीओए को सुरक्षित रख सकें।
यह एक वास्तविकता है कि जब से ट्रम्प ने अमरीका की सत्ता संभाली है उस समय से कई अन्तर्राष्ट्रीय समझौतों के बारे में ट्रम्प के फैसलों ने यूरोप को नाराज़ किया है। अब परमाणु समझौते के बारे में ट्रम्प के दृष्टिकोण के कारण यूरोप और अमरीका के बीच मतभेद उत्पन्न हुए हैं। ट्रम्प ने जेसीपीओए को अमरीका के लिए बेइज़्ज़ती का कारण बताते हुए इससे सबसे बुरा समझौता बताया। सितंबर 2017 में विश्व के 80 से अधिक विशेषज्ञों ने एक पत्र भेजकर परमाणु समझौते को बहुत उपयोगी बताया था। इन विशेषज्ञों ने अमरीकी राष्ट्रपति से मांग की है कि परमाणु समझौते को निरस्त करने के बारे में वे फिर से विचार करें। उधर ट्रम्प की नीति से यूरोपीय देश सहमत नहीं हैं। इसी बीच अमरीका के स्ट्रैटेजिक घटक कहे जाने वाले ब्रिटेन की प्रधानमंत्री ने भी जेसीपीओए को सुरक्षित रखने पर बल दिया है। यूरोपीय देशों का यह मानना है कि जेसीपीओए से निकलने की स्थिति में अमरीका को भारी क्षति उठानी होगी।उधर मोग्रीनी ने कहा है कि एेसी स्थिति में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अमरीका की साख बहुत ख़राब होगी। जानकारों का कहना है कि यरोपीय अधिकारों के बयानों से यह बात समझ में आती है कि उनके निकट जेसीपीओए बहुत उपयोगी समझौता है जिसका समर्थन करना चाहिए। वास्तव में यूरोपीय संघ, परमाणु समझौते या जेसीपीओए को एेसा समझौता मानता है जिसको अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन प्राप्त है जबकि केवल अमरीकी राष्ट्रपति ही के लिए यह चिंता का विषय बना हुआ है।