ट्रम्प की नीतियों से यूरोप अप्रसन्न
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यूरोप के बड़े देशों ने जेसीपीओए के बारे में अमरीकी राष्ट्रपति के दृष्टिकोण से असहमति जताई है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Oct १४, २०१७ १३:०० Asia/Kolkata
  • ट्रम्प की नीतियों से यूरोप अप्रसन्न

यूरोप के बड़े देशों ने जेसीपीओए के बारे में अमरीकी राष्ट्रपति के दृष्टिकोण से असहमति जताई है।

यूरोप के तीन बड़े देशों ब्रिटेन, जर्मनी और फ़्रांस के राष्ट्राध्यक्षों ने जेसीपीओए के बारे में अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प के बयान पर चिंता व्यक्त की है।  टेरीज़ा-मे, एंगेला मर्केल और मैकरोन ने संयुक्त बयान जारी करके ट्रम्प के बयान की भर्त्सना की है।  तीन यूरोपीय देशों का संयुक्त बयान, अमरीकी राष्ट्रपति की ओर से ईरान के बारे में पेश की गई नई स्ट्रैटेजी  के तुरंत बाद सामने आया है।  यूरोप के तीन बड़े देशों का स्पष्ट बयान और साथ ही जेसीपीओए के समर्थन में यूरोपीय संघ की विदेश नीति की प्रमुख फेड्रिका मोग्रीनी के बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कई महत्वपूर्ण विषयों पर अमरीका और यूरोपीय संघ के बीच गंभीर मतभेद पाए जाते हैं।  परमाणु समझौते के बारे में ट्रम्प की नकारात्मक नीति और इस अन्तर्राष्ट्रीय समझौते को तोड़ने के बारे में उनके वक्तव्य का अमरीका के समर्थकों और विरोधियों दोनों ने ही खुलकर विरोध किया है।

ट्रम्प के वाइट हाउस में पहुंचने के साथ ही अमरीकी राष्ट्रपति की बहुत सी नीतियों का यूरोपीय देशों की ओर से विरोध किया जाता रहा है। अब जेसीपीओए के बारे में ट्रम्प की नीति को लेकर यूरोप और अमरीका में दूरियां बढ़ रही हैं।  यूरोप के अनुसार जेसीपीओए, 13 वर्षों के कूटनीतिक प्रयासों का परिणाम है।  यूरोप का मानना है कि इस समझौते से पता चलता है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम, सैन्य लक्ष्यों की ओर उन्मुख नहीं हुआ है।  इस प्रकार जेसीपीओए को लेकर अमरीका और यूरोप दो अलग दिशाओं में जाते दिखाई दे रहे हैं।  इस समय यूरोप के लिए विश्व के देशों के साथ आर्थिक संबन्धों में विस्तार, उनकी विदेश नीतियों में सर्वोपरि है जबकि अमरीका की नीति इसके विपरीत है।  यूरोप का मानना है कि इस समय ईरान उनके लिए विशेष महत्व का स्वामी है।  यही कारण है कि यूरोप, ईरान के साथ अपने संबन्धों को अधिक से अधिक विस्तृत करने में लगा है।