सुरक्षा परिषद में अमरीका अलग थलग पड़ा
क़ुद्स शहर को ज़ायोनी शासन की राजधानी के रूप में अमरीकी राष्ट्रपति के मान्यता देने के फ़ैसले की समीक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की शुक्रवार को बैठक हुयी।
इस बैठक में अमरीका पूरी तरह अलग थलग पड़ गया और बैठक में मौजूद लगभग सभी देशों ने अमरीका के इस फ़ैसले के विरुद्ध बातचीत की।
सुरक्षा परिषद की यह बैठक इसके आधे से ज़्यादा सदस्यों की मांग पर आयोजित हुयी और बैठक के विषय से संबंध होने के कारण ज़ायोनी शासन और जार्डन के प्रतिनिधि भी इस बैठक में मौजूद थे।
पश्चिम एशिया में साठगांठ प्रक्रिया के समन्वयकर्ता निकोलाय म्लादिनोफ़ ने इस बैठक के शुरु में कहा कि ट्रम्प का फ़ैसला एकपक्षीय कार्यवाहियों की ख़तरनाक कड़ी के जन्म लेने और क्षेत्र में अशांति बढ़ने का कारण बन सकता है।
स्वीडन के प्रतिनिधि ओलोफ़ स्कूग ने भी इस बैठक में कहा कि ट्रम्प का क़ुद्स को ज़ायोनी शासन की राजधानी के रूप में मान्यता देने का क़दम अंतर्राष्ट्रीय प्रस्तावों के ख़िलाफ़ है।
ब्रिटेन के प्रतिनिधि मैथ्यू रायक्राफ़्ट ने भी इस बैठक में इस बात पर बल देते हुए कि लंदन की अपने दूतावास को क़ुद्स स्थानांतरित करने की कोई योजना नहीं है, कहा कि ब्रिटेन अमरीका के फ़ैसले का विरोध करता है।
फ़्रांस के प्रतिनिधि फ़्रांसवा दलात्रे ने कहा कि पेरिस को अमरीका के फ़ैसले पर अफ़सोस और चिंता है।
संयुक्त राष्ट्र संघ में रूस के दूत वैस्ली नेबेन्ज़िया ने भी सुरक्षा परिषद की बैठक में कहा कि ट्रम्प के फ़ैसले से स्थिति और जटिल हो जाएगी।
चीन के प्रतिनिधि ने अमरीका के फ़ैसले पर चिंता जतायी।
इसी तरह इटली, उरुग्वे, सेनेगल, बोलिविया, इथोपिया, क़ज़्ज़ाक़िस्तान, युक्रेन, जापान और जार्डन ने भी ट्रम्प के फ़ैसले का विरोध और उसे चिंताजनक बताया।
इस बैठक में फ़िलिस्तीन के प्रतिनिधि रियाज़ मंसूर ने क़ुद्स को फ़िलिस्तीनियों की लाल रेखा की संज्ञा देते हुए कहा कि क़ुद्स फ़िलिस्तीनियों का था और रहेगा। (MAQ/N)