एक तसवीर जिसने दो देशों में पैदा कर दिया तनाव
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अलजीरिया और सऊदी अरब के संबंध इन दिनों बड़े कठिन चरण से गुज़र रहे हैं और तनाव बढ़ने की संभावना है, अगर धमकियों का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो यह तनाव नियंत्रण से बाहर हो जाएगा।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Dec १९, २०१७ १५:०१ Asia/Kolkata
  • एक तसवीर जिसने दो देशों में पैदा कर दिया तनाव

अलजीरिया और सऊदी अरब के संबंध इन दिनों बड़े कठिन चरण से गुज़र रहे हैं और तनाव बढ़ने की संभावना है, अगर धमकियों का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो यह तनाव नियंत्रण से बाहर हो जाएगा।

पूर्वी अलजीरिया के ऐन मलीला शहर के फ़ुटबाल स्टेडियम के ऊपर एक बहुत बड़ी तसवीर लगाई गई। यह एक चेहरे की तसवीर थी जिसका आधा हिस्सा सऊदी नरेश शाह सलमान का और दूसरा आधा हिस्सा अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प का था। इस चेहरे के क़रीब मस्जिदुल अक़सा क तसवीर भी बनी हुई थी तसवीर पर लिखा हुआ था कि एक ही सिक्के के दो रुख़।

फ़ुटबाल दर्शकों ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प द्वारा बैतुल मुक़द्दस शहर को इस्राईल की राजधानी घोषित किए जाने पर आपत्ति जताते हुए यह विशालकाय चित्र स्टेडिमय पर लगा दिया।

सऊदी अरब के अधिकारियों को आलोचना सुनना बहुत बुरा लगता है। पिछले 80 साल के दौरान सऊदी अधिकारियों ने अरब देशों के आपसी विवादों में ख़ुद को मध्यस्थ के रूप में पेश किया और हर प्रकार की आलोचना से खुद को दूर रखा। मगर हालिया वर्षों में स्थिति पूर्णतः बदल गई है। सऊदी अरब अब अन्य देशों जैसे सीरिया के आंतरिक मामलों में खुल कर हस्तक्षेप कर रहा है। सीरिया में सरकार के विरुद्ध लड़ने वाले संगठनों को सऊदी अरब ने लाखों टन हथियार सप्लाई कर दिए जबकि यमन पर तो उसने व्यापक रूप से युद्ध थोप दिया जिसमें 12 हज़ार से अधिक आम नागरिक मारे गए हैं और पूरा देश तबाह होकर रह गया है।

दूसरी ओर सऊदी अरब की सरकार ने अपने टीकाकारों को खुली छूट दे दी कि वह फ़िलिस्तीनी राष्ट्र की आलोचना करें और बैतुल मुक़द्दस को इस्राईल की राजधानी घोषित करने के अमरीकी राष्ट्रपति के फ़ैसले का बचाव करें। इसके बाद सऊदी टीकाकारों ने यह कहना शुरू कर दिया कि इस्राईल ने अब तक एक भी सऊदी नागरिक को निशाना नहीं बनाया है और फ़िलिस्तीनियों ने ख़ुद अपनी ज़मीन यहूदियों की बेची थी अतः अब उन्हें विरोध करने का अधिकार नहीं है।

अलजीरिया की सरकार और जनता ने फ़िलिस्तीन और बैतुल मुक़द्दस के मामले में हमेशा खुल कर अपना पक्ष रखा है। अलजीरिया की दृष्टि में फ़िलिस्तीन का मुद्दा पहली प्राथमिकता है। अलजीरिया ने सभी फ़िलिस्तीनी संगठनों को अपने यहां शरण दी यहां तक कि निर्वासित फ़िलिस्तीनी संसद का सत्र भी अलजीरिया में होता रहा।

ऐसी स्थिति में फ़िलिस्तीन को लेकर सऊदी अरब और अलजीरिया के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है। यही नहीं अलजीरिया ने इराक़, सीरिया और यमन के मामले में भी सऊदी अरब का साथ नहीं दिया और लीबिया में सऊदी अरब के हस्तक्षेप का विरोध किया। अतः यदि अलजीरियाई फ़ुटबाल दर्शकों ने बैतुल मुक़द्दस के मामले में यह क़दम उठाया है तो बिल्कुल स्वाभाविक है।

इस घटना के बाद सऊदी अरब के ट्रोल्ज़ ने अलजीरिया की सरकार और जनता को सोशल मीडिया पर निशाना बनाया।

सऊदी अरब का रवैया पूरी तरह बदल चुका है। अब अन्य देशों में सऊदी अरब के राजूदत कूटनयिक परम्पराओं को तोड़ते हुए हस्तक्षेपपूर्ण बयान दे रहे हैं। यही हरकत जार्डन में सऊदी अरब के राजदूत ख़ालिद फ़ैसल बिन तुर्की ने की और इससे पहले इराक़ में सऊदी अरब के पूर्व राजदूत सामिर अस्सबहान भी यही करते हैं। अब अलजीरिया में सऊदी अरब के राजदूत ने धमकी दी है।

हमें यह नहीं पता कि इस तनाव का अंजाम क्या होगा लेकिन इतना तो तय है कि मोरीतानिया को छोड़कर उत्तरी अफ़्रीक़ा के सभी देशों से सऊदी अरब के संबंध ख़राब हैं। इसके अलावा सीरिया, लेबनान, इराक़, क़तर, ओमान और सूडान के साथ भी सऊदी अरब के संबंध ख़राब हैं। जब यह स्थिति है तो यही लगता है कि सऊदी अरब को अपनी नीतियों और कूटनीति पर पुनरविचार करने की ज़रूरत है।

साभार रायुल यौम