ट्रम्प एक बार फिर पीछे हटे
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ने एक बार फिर ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों को स्थगित कर दिया है। डोनाल्ड ट्रम्प ने धमकी दी है कि वह आखिरी बार एसा कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने यूरोप को धमकी देते हुए कहा है कि अगर ईरान के साथ होने वाले परमाणु समझौते में परिवर्तन नहीं किया गया तो वे ईरान के विरुद्ध प्रतिबंधों को स्थगित नहीं करेंगे और अमेरिका आधिकारिक रूप से परमाणु समझौते से निकल जायेगा।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प चाहते हैं कि परमाणु समझौते में ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को शामिल किया जाये और साथ ही वह यह भी चाहते हैं कि जो कुछ समय के लिए परमाणु सीमा है उसे स्थाई बनाया जाये। परमाणु समझौते में बाकी रहने के लिए ट्रम्प की ये शर्तें हैं जबकि ईरान और गुट पांच धन के मध्य होने वाले परमाणु समझौते में वे चीज़ें शामिल नहीं हैं जिसकी ट्रम्प मांग कर रहे हैं।
थोड़ी देर के लिए मान लें कि यदि यूरोपीय संघ भी ट्रम्प की हां में हां मिला दे तब भी परमाणु समझौते में परिवर्तन करने के लिए वार्ता आरंभ कराने हेतु ईरान, रूस और चीन की सहमति की ज़रूरत पड़ेगी और इन तीनों देशों ने बारमबार घोषणा की है कि परमाणु समझौते में परिवर्तन के लिए वे हर प्रकार की वार्ता के विरोधी हैं। यूरोपीय संघ ने भी ट्रम्प के हालिया कदम के बाद घोषणा की है कि वह पूरी तरह परमाणु समझौते के संचालन के प्रति कटिबद्ध रहेगा।
इस आधार पर प्रतीत नहीं हो रहा है कि अगले 120 दिनों में भी ट्रम्प की मांग व्यवहारिक हो सकेगी। उस स्थिति में अमेरिकी सरकार या अपनी हठधर्मी छोड़कर परमाणु समझौते में बाक़ी रहेगी या उससे निकल जायेगी। अमेरिकी सरकार के परमाणु समझौते से निकल जाने का अर्थ उन वचनों का निरस्त हो जाना है जिनके प्रति ईरान प्रतिबद्ध है। ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने बारमबार घोषणा की है कि वे कम से कम अवधि में परमाणु समझौते से पहले वाली स्थिति में दोबारा लौटने की तत्परता रखते हैं और यह भी संभव है कि ईरान की शांतिपूर्ण परमाणु गतिविधियां उस समय से भी आगे निकल जायें। MM