अमरीकी न्यूक्लियर पास्चर रिव्यू पर बहस तेज़
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अमरीका के रक्षामंत्री ने एनपीआर अर्थात न्यूक्लियर पास्चर रिव्यू पेश किया है जिसपर बहस तेज़ हो गई है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Feb ०४, २०१८ १४:०९ Asia/Kolkata
  • अमरीकी न्यूक्लियर पास्चर रिव्यू पर बहस तेज़

अमरीका के रक्षामंत्री ने एनपीआर अर्थात न्यूक्लियर पास्चर रिव्यू पेश किया है जिसपर बहस तेज़ हो गई है।

अमरीकी राष्ट्रपति का कहना है कि 21वीं शताब्दी की बढ़ती चुनौतियों के दृष्टिगत नई रणनीति बनाई गई है जिसमें सेना के तीनों अंगों के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाना है।‎ट्रम्प प्रशासन का कहना है कि नए छोटे परमाणु बम विकसित करके अमरीका की रक्षा क्षमता बढ़ाई जाएगी।  अमरीकी रक्षामंत्री ने एनपीआर अर्थात न्यूक्लियर पास्चर रिवियू पेश करते हुए कहा है कि प्रभावी परमाणु प्रतिरोध बनाए रखना,  युद्ध लड़ने की तुलना में कम मंहगा पड़ता है।  उन्होंने कहा कि हम अपनी परमाणु क्षमता को प्रभावशाली बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

अमरीका की नई परमाणु नीति पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए ईरान के विदेशमंत्री ने ट्वीट किया है कि अमरीका की परमाणु स्थिति की समीक्षा, एनपीटी का खुला उल्लंघन है।  उन्होंने कहा कि "डूम्सडे क्लाॅक" इस समय ख़तरनाक स्थिति में पहुंच गई है।  ज्ञात रहे कि वैज्ञानिकों ने परमाणु युद्ध के संभावित ख़तरे को दर्शाने के उद्देश्य से एक घड़ी बनाई है जिसे डूम्सडे क्लाक कहा जाता है।  जब इसमें 12 बजेंगे तो इसका अर्थ होगा परमाणु युद्ध का छिड़ना।

अमरीका के जानेमाने विचारक, इस देश की नीतियों की आलोचना करते हुए कहते हैं कि वर्तमान समय में विश्व बहुत तेज़ी से दो खाइयों की ओर बढ़ रही है जिसमें गिरकर उसका विनाश सुनिश्चित है।  इनमें से एक पर्यावरण का ख़तरा और दूसरा परमाणु ख़तरा है।  वर्तमान समय में अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प संसार को एक ही समय में दोनों खाइयों की ओर ले जा रहे हैं।  अमरीका की नई परमाणु रणनीति, पूरे विश्व के लिए परमाणु ख़तरे को अधिक बढ़ाने वाली है क्योंकि इसमें स्पष्ट रूप में हमले की स्थिति में परमाणु हमला करने की अनुमति दी गई है।  एक टीकाकार माइकल डाॅज का कहना है कि अमरीका की नई परमाणु नीति की प्रस्तावना में  वाशिग्टन की ओर से जवाबी कार्यवाही की बात को अस्पष्ट रखा गया है ताकि अपने प्रतिद्वंदवियों के मुक़ाबले में मज़बूत स्थिति में रहे।  इस अमरीकी परमाणु रणनीति की सबसे ख़तरनाक बात यह है कि इसमें परमाणु हथियारों को प्रतिरोधक क्षमता के रूप में पेश किया गया है।  अब सवाल यह पैदा होता है कि इन ख़तरनाक विचारों के साथ अमरीका, पूरे विश्व में किस प्रकार से स्वयं को परमाणु चुनौतियों के प्रति चिंतित दर्शा रहा है?