म्यांमार में जातीय सफाया, संयुक्त राष्ट्र संघ ने चेतावनी दी
संयुक्त राष्ट्र संघ के मानवाधिकार आयुक्त "ज़ैद रअदुल हुसैन" ने म्यांमार में सरकार की ओर से जारी मुसलमानों के जातीय सफाए के भयानक परिणामों की ओर से सचेत किया है।
म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों की दशा के बारे में चिंता की ताज़ा लहर, इस देश के संकटग्रस्त प्रांत राख़ीन में कई सामूहिक क़ब्रों के मिलने के बाद उठी है। इन क़ब्रों में 400 से अधिक लाशें मिली हैं। म्यांमार में जो अपराध हो रहे हैं उनमें से अधिकांश पर इस लिए पर्दा पड़ा हुआ है क्योंकि म्यांमार की सरकार पत्रकारों और रिपोर्टरों पर विभिन्न प्रकार के प्रतिबंध लगाए है।
संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रवक्ता" स्टीफन डोगरिक" का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र संघ रोहिंग्या मुसलमानों को नागरिक अधिकार दिये जाने की मांग करता है या फिर ऐसे क़ानून बनाए जाने का इच्छुक है जिनके आधार पर रोहिंग्या मुसलमान, राखीन में स्वतंत्रतापूर्वक और स्वाभाविक रूप से जीवन व्यतीत कर सकें।
संयुक्त राष्ट्र संघ में इस्लामी गणतंत्र ईरान के स्थायी प्रतिनिधि "ग़ुलामअली ख़ुशरो" का कहना है कि रोहिंग्या मुसलमानों की समस्याओं को विश्व समुदाय के निकट एक अपातकालीन समस्या के रूप में देखा जाता है इसलिए इस पर तत्काल कार्यवाही की ज़रूरत है और संयुक्त राष्ट्र संघ को भी महासभा द्वारा इस मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए।
बहरहाल म्यांमार में जातीय सफाया, एक अंतरराष्ट्रीय समस्या है और सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों पर इस जातीय सफाए की रोकथाम करने की भारी ज़िम्मेदारी है इसलिए जातीय सफाए को जारी रखने के लिए म्यांमार की सरकार की ओर से चीन जैसे कुछ देशों का सहारा लेने से निश्चित रूप से विश्व जनमत में इन देशों की बदनामी होगी। MM