परमाणु समझौते का उल्लंघन, पूरी दुनिया ने प्रतिक्रिया प्रकट की
युरोपीय संघ, युरोपीय अधिकारियों और संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव ने जेसीपीओए से निकलने के ट्रम्प के फैसले पर प्रतिक्रिया प्रकट की है।
यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रभारी फ़ेडरीका मोग्रीनी ने मंगलवार की रात अमरीकी राष्ट्रपति की ओर से परमाणु समझौते से बाहर निकलने की घोषणा के बाद कहा कि ईरान के साथ परमाणु समझौता 12 साल के कूटनैतिक प्रयासों का नतीजा था जिसका संबंध पूरी दुनिया से है। उन्होंने ईरान के अधिकारियों से अनुरोध किया कि वह किसी को इस बात का अवसर न दें कि इस समझौते में विघ्न पैदा करे।
फ़ेडरीका मोग्रीनी ने कहा कि उन्हें आईएईए की स्वाधीनता और उसके कामकाज पर पूरा भरोसा है और आईएईए ने अपनी 10 रिपोर्टों में साफ़ साफ़ कहा है कि ईरान परमाणु समझौते के तहत अपनी सारी प्रतिबद्धताओं पर अमल कर रहा है।
मोग्रीनी ने कहा कि परमाणु समझौता का एक प्रमुख और अनिवार्य भाग ईरान पर लगे परमाणु प्रतिबंधों का हटाया जाना है और यूरोपीय संघ इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि इस बात को सुनिश्चित करे कि ईरानी राष्ट्र को प्रतिबंध हटाए जाने का लाभ मिल रहा है।
अमरीका की ओर से नए प्रतिबंधों की संभावना पर चिंता जताते हुए मोग्रीनी ने कहा कि यूरोपीय संघ परमाणु समझौते के तहत पूंजीनिवेश करने वाली यूरोपीय कंपनियों का समर्थन करेगा।
ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरेज़ा मे , जर्मन चांसलर एंगिला मर्केल और फ्रांस के राष्ट्रपति एमानोएल मैक्रां ने भी एक बयान जारी करके जेसीपीओए से अपनी प्रतिबद्धता पर बल दिया।
बयान में कहा गया है कि जेसीपीओए सुरक्षा परिषद में बहुमत के साथ पारित हुआ है और यह समझौता तीनों युरोपीय देशों के लिए यथावत अहम रहेगा ।
दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी एक बयान जारी करके बल दिया है कि जेसीपीओए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है जिससे अंतराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा में मदद मिल रही है।
रूस के विदेशमंत्री ने भी एक बयान जारी करके ट्रम्प के फैसले पर चिंता प्रकट करते हुए बल दिया कि ईरान , जेसीपीओए पर पूरी तरह से प्रतिबद्ध रहा और इसकी परमाणु ऊर्जा की अंतरराष्ट्रीय एजेन्सी ने भी पुष्टि की है। (Q.A.)