अमरीका - योरोप के बीच ख़त्म होता भरोसा
जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल ने कहा कि योरोप अब अपनी रक्षा के लिए अमरीका पर भरोसा नहीं कर सकता। मर्केल ने योरोप में अपने भागीदार देशों से अपील की कि अपने भविष्य का फ़ैसला ख़ुद करें क्योंकि अब अमरीका भरोसे के लायक़ नहीं रह गया है।
ट्रम्प की हुकूमत में अमरीका के मौजूदा व्यवहार की ओर से जर्मन चांसलर की चिंता यह दर्शाती है कि अनेक मुद्दों पर योरोप-अमरीका के बीच गहरे मतभेद हैं।
योरोपीय संघ के दृष्टिकोण के ख़िलाफ़ ट्रम्प के दृष्टिकोण और द्विपक्षीय संबंधों सहित अंतर्राष्ट्रीय मामलों में कुछ योरोपीय देशों ख़ास तौर पर जर्मन और फ़्रांसीसी राष्ट्राध्यक्षों की ओर से ट्रम्प की आलोचना के बाद अब योरोपीय संघ और अमरीका के बीच संबंध का स्वरूप रणनैतिक सहयोग से भागीदारी में बदल रहा है। दोनों पक्षों के बीच मतभेद जिन विषयों पर हैं वे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, नेटो में योरोप का रोल, रूस के साथ संबंध का स्वरूप, पेरिस जलवायु संधि से लेकर ईरान के साथ हुए पमराणु समझौते के संबंध में अमरीका का दृष्टिकोण है। इन सभी विषयों में ट्रम्प ने सिर्फ़ अपने दृष्टिकोण को अहमियत दी और बाक़ी देशों के हितों व दृष्टिकोण को कोई अहमियत न दी यहां तक कि एटलांटिक महासागर के उस तट पर स्थित अपने योरोपीय भागीदारों के दृष्टिकोण को भी।
योरोप अब यह बात समझ चुका है कि ट्रम्प सिर्फ़ और सिर्फ़ अमरीकी हितों को मद्देनज़र रख कर फ़ैसला कर रहे हैं और उनकी नज़र में योरोप की कोई अहमियत नहीं है। जैसाकि आयात ड्यूटी बढ़ाने का ट्रम्प का फ़ैसला यह दर्शाता है कि वह योरोपीय देशों पर दबाव बढ़ाना चाहते हैं। यह ऐसी हालत में है कि इससे पहले अमरीका-योरोप के व्यापारिक संबंध संयुक्त हितों पर आधारित थे। इसके साथ ही मर्केल का दृष्टिकोण यह दर्शाता है कि अब आगे से योरोप बहुत से मामलों में अमरीका से अलग नीति अपनाएगा।(MAQ/T)