ईरान के आंतरिक मामलों में ट्रम्प का फिर हस्तक्षेप
ईरान में इस्लामी क्रांति के सफल होने के समय से ही अमरीका हमेशा से इस्लामी व्यवस्था का शत्रु रहा है और हमेशा से उसका प्रयास ईरान को कमज़ोर करने का रहा है। यह प्रयास पिछले चालीस वर्षों से विभिन्न क्षेत्रों में जारी है।
अमरीका में ट्रम्प के सत्ता में पहुंचने के बाद से यह प्रयास तेज़ हो गये और अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने ईरान से खुलकर दुश्मनी शुरु कर दी। उन्होंने अपने क्षेत्रीय घटकों को मिलाते हुए इस्लामी व्यवस्था को गिराने की अपनी कार्यवाहियां तेज़ कर दीं।
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प यह सोचते हैं कि जेसीपीओए से निकलकर और ईरान पर दूसरे चरण के प्रतिबंध लगाकर ईरान को घुटने टेकने पर विवश कर देंगे। ट्रम्प का मुख्य लक्ष्य जिसकी घोषणा उन्होंने की है कि ईरान की आर्थिक स्थिति को दिन प्रतिदिन ख़राब करना है ताकि देश की जनता व्यवस्था से नाराज़ हो जाए और अंत में जनता देश की आर्थिक स्थिति से तंग आकर विद्रोह शुरु कर दे।
वास्तव में वाशिंग्टन ने ईरान के बारे में निर्धनता और विद्रोह की नीति अपना रखी है। ट्रम्प का दावा है कि वह अपने बयानों और नीतियों विशेषकर परमाणु समझौते के बारे में बेतुका बयान देकर ईरान की ख़राब आर्थिक प्रक्रिया शुरु की और अब वह ईरान में विद्रोह का दावा भी कर रहे हैं।
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने इस बारे में फ़ाक्स न्यूज़ एजेन्सी से साक्षात्कार में दावा किया कि ईरानियों ने विभिन्न शहरों में विद्रोह कर दिया है और व्यापक स्तर पर गिरावट है और गिरावट का यह क्रम तेज़ी से जारी हे। उनका दावा था कि पूरे देश में व्यापक स्तर पर प्रदर्शन हो रहे हैं और संभावित रूप से इस प्रकार के प्रदर्शन कभी ईरान में नहीं हुए और जब से मैंने परमाणु समझौते को समाप्त किया है, झड़पें शुरु हो गयीं और अब हम यह देख रहे हैं कि क्या होता है।
बहरहाल अमरीका शुरु से ही ईरान से दुश्मनी करता रहा है किन्तु जनता की होशियारी से अब तक वह इस्लामी व्यवस्था का कुछ बिगाड़ नहीं सका है। (AK)