पत्रकारों के बारे में ट्रम्प की नीतिः "चुप हो जाओ वरना...."
वरिष्ठ लेखक साइमन टेस्डल ने आब्ज़रवर पत्रिका में एक लेख लिखा है जिसमें उन्होंने इस बात पर बल दिया है कि मीडिया के ख़िलाफ़ ट्रम्प ने जो युद्ध छेड़ दिया है कि परिणाम बहुत भयानक हो सकते हैं।
उनका मानना है कि ट्रम्प पत्रकारों और पत्रकारियों की दुशमनी में सारी सीमाएं पार कर दी हैं। ट्रम्प बार बार मीडिया पर हमला कर रहा है यह तथ्य और सत्य के लिए बड़ा ख़तरा होने के साथ ही साथ मीडिया और पत्रकारों को गंभीर ख़तरे में डालने वाली प्रक्रिया है। इसके नतीजे में पत्रकार हमेशा ख़तरे में रहेंगे। ट्रम्प यही संदेश दे रहे हैं कि पत्रकारों से इस तरह पेश आना चाहिए जैसे वह जनता के कट्टर दुशमन हैं।
ट्रम्प ने जब से अपनी चुनावी अभियान शुरू किया तभी से वह इस बात को लेकर पूरी तरह स्पष्ट थे कि मीडिया और पत्रकार फ़ेक न्यूज़ गढ़ते हैं और उनके ख़िलाफ़ प्रचारिक युद्ध में व्यस्त हैं फिर उन्होंने अपनी पार्टी और पूरे देश को मीडिया के विरुद्ध लामबंद करने की कोशिश शुरू कर दी।
ट्रम्प के इस रवैए का नतीजा यह है कि इस समय पत्रकारों की जान ख़तरे में पड़ गई है। मैरीलैंड में यही हुआ जहां एक व्यक्ति ने एक समाचार पत्र के कार्यालय पर हमला करके 5 लोगों की हत्या कर दी इसलिए कि अख़बार में जो कुछ लिखा जा रहा था वह इस व्यक्ति को पसंद नहीं आ रहा था।
पत्रकारों के बारे में ट्रम्प की नीति बिल्कुल साफ़ है कि "चुप हो जाए वरना...."