प्रतिबंधों की अमरीकी नीति से अरब अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव
अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने ईरान के अलावा तुर्की पर भी ग़ैर क़ानूनी प्रतिबंध लगा दिए हैं। साक्ष्यों से पता चलता है कि अमरीका के प्रतिबंधों की आंच केवल ईरान व तुर्की तक सीमित नहीं है बल्कि इसकी चपेट में अरब देशों की अर्थव्यवस्था भी आ रही है।
ट्रम्प के व्यापारिक व आर्थिक युद्ध का कोई अंत नहीं है। वस्तुतः उन्होंने अपनी नीतियों, रवैये और बयानों से व्यवहारिक रूप से संसार में कुव्यवस्था को बढ़ावा दिया है और वे आर्थिक हथकंडों से अन्य देशों पर दबाव डालने का काम ले रहे हैं। संसार विशेष कर मध्यपूर्व के क्षेत्र में उनकी इस नीति से अरब देशों की अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहे हैं। सच्चाई यह है कि देशों की अर्थव्यवस्थाएं न केवल एक दूसरे से पूरी तरह अलग नहीं हैं बल्कि वे एक दूसरे से जुड़ी हुई भी हैं। उदाहरण स्वरूप क़तर का राष्ट्रीय बैंक, तुर्की के फ़ायनेंस बैंक का मालिक है और इसी तरह से क़तर के व्यापारिक बैंक के पास तुर्की के अलटरनेटिव बैंक के सबसे अधिक शेयर हैं।
इसके अलावा अमरीका की ट्रम्प सरकार ने इस्लामी गणतंत्र ईरान के ख़िलाफ़ जो आर्थिक युद्ध छेड़ दिया है उसके उन अरब देशों की अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेंगे जो वाॅशिंग्टन के घटक हैं। मिसाल के तौर पर परमाणु समझौते से अमरीका के निकलने के कुछ ही दिन बाद एक अरब समाचारपत्र ने लिखा था कि अमरीका के इस क़दम से और ईरान पर प्रतिबंध बहाल करने से तेल के मूल्यों में वृद्धि होगी और चूंकि मिस्र तेल आयात करने वाला देश है इस लिए इस नीति से उसकी अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
वास्तविकता यह है कि अमरीकी राष्ट्रपति देशों के ख़िलाफ़ आर्थिक युद्ध छेड़ कर और प्रतिबंध लगाकर अपने घटक देशों के हितों को भी ध्यान में नहीं रख रहे हैं और वैश्विक राजनीति में ग़ुंडागर्दी पर उतारू दिखाई देते हैं। (HN)