... तो ईरान में अमरीका मुर्दाबाद का नारा नहीं लगेगा...
रूस की स्पूतनिक न्यूज़ एजेन्सी की वेबसाइट पर प्रकाशित एक लेख में बताया गया है कि ईरानी क्यों " अमरीका मुर्दाबाद" का नारा लगाते हैं और इस नारे का सही अर्थ क्या है?
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने बहुत से भाषणों में इस बात पर आपत्ति प्रकट की है कि ईरान में " अमरीका मुर्दाबाद" का नारा लगाया जाता है और उन्होंने खुल कर कहा है कि उन्हें उस देश से समस्या है जहां " अमरीका मुर्दाबाद " का नारा लगाया जाता हो।
अस्ल बात यह है कि अमरीकी अनुवादकों ने " अमरीका मुर्दाबाद " का सही अर्थ , अमरीकी राष्ट्रपति को बताया ही नहीं। फार्सी भाषा बेदह समृद्ध है और इस भाषा में एक शब्द के कई- कई अर्थ हो सकते हैं और यह भी संभव है कि कई शब्दों को मिला कर एक वाक्य बनाया जाए जिसका अनुवाद, अग्रेज़ी में संभव ही न हो।
यदि हम इस नारे का शाब्दिक अर्थ निकालें तो वही होगा जो ट्रम्प और अन्य अमरीकी अधिकारियों के दिमाग़ में है लेकिन हक़ीक़त यह है कि इसका वह अर्थ है ही नहीं!
ईरान में जो " अमरीका मुर्दाबाद " का नारा लगाया जाता है उसका अर्थ अमरीका की उन नीतियों के अंत की इच्छा है जो 2 प्रतिशत अमरीकियों की ओर से अमरीका और पूरी दुनिया पर थोपी जाती हैं और निश्चित रूप से इस नारे का मतलब , संयुक्त राज्य अमरीका का अंत नहीं है।
आप ने ध्यान दिया होगा कि जब भी अमरीकी नेता, किसी देश के खिलाफ कार्यवाही करना चाहते हैं , उस पर हमला करना चाहते हैं या प्रतिबंध लगाना चाहते हैं या फिर जब किसी अंतरराष्ट्रीय समझौते के उल्लंघन का उनका मन होता है तो वह बार बार कहते हैं कि यह सब कुछ वह अमरीका के राष्ट्रीय हित के लिए कर रहे हैं, लेकिन क्या कभी किसी ने उनसे पूछा है कि अमरीका के राष्ट्रीय हित हैं क्या? क्या यह राष्ट्रीय हित सभी अमरीकियों के हित हैं या फिर मात्र दो प्रतिशत अमरीकियों के हितों का मामला है?
या कभी किसी ने यह सवाल किया है कि अमरीकी हितों के दायरे में क्या दूसरे देशों के राष्ट्रीय हितों को भी कोई जगह दी गयी है या नहीं?
विश्व के सभी देशों के अपने-अपने हित हैं जिनकी सुरक्षा की जानी चाहिए तो क्या अमरीका को यह अधिकार है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों के लिए अन्य देशों के राष्ट्रीय हितों को पैरों तले रौंद दे?
आप अगर किसी समाज में रहते हैं तो क्या उस समाज में आप दूसरों के अधिकारों का हनन केवल अपनी इस दलील से कि आप के हितों की रक्षा होनी चाहिए, कर सकते हैं? और यदि आप ताक़त या जान-पहचान की वजह से यह काम करते हैं तो क्या समाज में आप की इज़्ज़त होगी?
आप कल्पना करें कि दो प्रतिशत अमरीका, अमरीकी समाज ही नहीं विश्व समुदाय के अधिकारों का हनन केवल इस लिए करते हैं ताकि उनके " हित" सुरक्षित रहें। इन दो फीसद अमरीकियों के लोभ की कोई सीमा नहीं और यही वजह है कि पूरी दुनिया में उनकी लूटपाट से कोई सुरक्षित नहीं , " अमरीका मुर्दाबाद " इस लोभ का विरोध है जिसकी वजह से दुनिया बर्बाद हो रही है।
अमरीका, अपने कथित हितों की रक्षा के लिए अपने सैनिकों को दसियों हज़ार किलोमीटर की दूसरी से इस इलाक़े में भेजता है केवल इस लिए ताकि उसके हथियारों की बिक्री बढ़े और इस इलाक़े के देशों के प्राकृतिक संसाधनों को लूटा जा सके।
इस लूटपाट का फायदा, पुंजीपतियों के दास बन चुके अधिकांश अमरीकियों को नहीं होता वह तो बस, दो प्रतिशत अमरीकियों के लोभ की भट्टी में जलते हैं।
आप के लिए यह जानना रोचक होगा कि लगभग सत्तर लाख ईरानी या ईरानी मूल के लोग, अमरीका में रहते हैं अर्थात, ईरानी राष्ट्र का लगभग दस प्रतिशत भाग, अमरीका में है।
इस लिए अगर दोस्ती की बात की जाए तो अमरीका और ईरान में दोस्ती का वातावरण अन्य देशों की तुलना में अधिक है मगर यह जो दो प्रतिशत अमरीकी हैं उन्हें यह ध्यान रखना होगा कि जिस तरह से अमरीका के राष्ट्रीय हित हैं उसी तरह से ईरान के भी राष्ट्रीय हित हैं और समस्या तब होती है जब दोनों के हितों में टकराव होता है।
अगर अमरीकी नेता यह चाहते हैं कि " अमरीका मुर्दाबाद " का नारा बदल जाए तो उन्हें यह ध्यान रखना होगा कि ईरानी जनता, इलाक़े के अन्य देशों की जनता स भिन्न है और अगर ईरान के राष्ट्रीय हितों पर ध्यान न दिया गया तो फिर किसी भी दशा में ईरानी जनता के साथ समझौता नहीं हो सकता।
आजकल अमरीकी, उठते- बैठते ईरान को वार्ता का निमंत्रण दे रहे हैं लेकिन उन्हें मालूम होना चाहिए कि ईरान के राष्ट्रीय हितों पर ध्यान दिये बिना वार्ता का कोई सवाल ही नहीं। इस लिए " अमरीका मुर्दाबाद " के नारे के अंत के लिए अमरीका को सब से पहले ईरान और ईरानियों के खिलाफ दुश्मनी की नीति छोड़ना होगी। (Q.A.)
(साभारः स्पूतनिक। लेखक के विचारों से पार्स टूडे का सहमत होना आवश्यक नहीं।
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