म्यांमार के पत्रकारों की आज़ादी के लिए राष्ट्रसंघ ने लगाई गुहार
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संयुक्त राष्ट्रसंघ ने मांग की है कि रोहिंग्या मुसलमानों पर अत्याचारों के बारे में जो पत्रकार रिपोर्ट बना रहे थे उनको म्यांमार सरकार तुरंत स्वतंत्र करे।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Sep ०४, २०१८ ०६:३८ Asia/Kolkata
  • म्यांमार के पत्रकारों की आज़ादी के लिए राष्ट्रसंघ ने लगाई गुहार

संयुक्त राष्ट्रसंघ ने मांग की है कि रोहिंग्या मुसलमानों पर अत्याचारों के बारे में जो पत्रकार रिपोर्ट बना रहे थे उनको म्यांमार सरकार तुरंत स्वतंत्र करे।

संयुक्त राष्ट्र संघ ने रॉयटर्स के उन दो पत्रकारों की तत्काल स्वतंत्रता की मांग की है जो म्यांमार में इस देश की सेना दवारा सुनियोजित ढंग से किये गए रोहिंग्या मुसलमानों के जनसंहार के बारे में रिपोर्ट तैयार कर रहे थे।

संयुक्त राष्ट्र संघ की नई मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बाचेलेट ने कहा है कि कि म्यांमार में रॉयटर्स के दो पत्रकारों को सात साल जेल की सजा से वे हैरान हैं। उन्होंने इन पत्रकारों की तुरंत रिहाई की मांग की है।  चिली की पूर्व राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के तौर पर अपने पहले दिन इस घटनाक्रम पर संवाददाताओं से कहा कि वह हैरान हैं।  उन्होंने अपने एक बयान में कहा कि यह मुकदमा, वास्तव में न्याय का मज़ाक़ है।  उनका कहना था कि मैं म्यांमार से बिना शर्त दोनों पत्रकारों की रिहाई का आग्रह करती हूं।  इसी बीच रॉयटर्स समाचार एजेन्सी ने भी अपने दोनो पत्रकारों के विरुद्ध केस को मनगढंत बताया है।

दूसरी ओर ब्रिटेन ने भी दोनों पत्रकारों वा लोन और क्याव सो ओ को तुरंत रिहा किए जाने की मांग करते हुए कहा है कि यह फैसला मीडिया की स्वतंत्रता पर कुठाराघात है।  ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरेसा मे के प्रवक्ता ने कहा कि हम इस फैसले और सज़ा से बहुत निराश हैं।  उन्होंने कहा कि हम आह्वान करते हैं कि दोनो पत्रकारों को फौरन रिहा किया जाना चहिए।

ज्ञात रहे कि रोहिंग्या रिपोर्टिंग मामले की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने सोमवार को रॉयटर्स के दो पत्रकारों को सात-सात साल जेल की सजा सुनाई। यह सजा रोहिंग्या संकट पर उनके द्वारा की गई रिपोर्टिंग में म्यांमार के सरकारी गोपनीयता कानून का तथाकथित उल्लंघन करने के सिलसिले में सुनाई गई है। बता दें कि म्यांमार में रोहिंग्या शरणार्थियों पर की जा रही हिंसा की रिपोर्टिंग के दौरान रॉयटर्स के दो रिपोर्टर दिसंबर से जेल में हैं।

उल्लेखनीय है कि म्यांमार की सेना लंबे समय से इस देश के बौद्ध चरमपंथियों के साथ मिलकर वहां के निवासी रोहिंग्या मुसलमानों के विरुद्ध हिंसक कार्यवाहियां कर रही है।