ट्रम्प की ख़तरनाक विदेश नीति पर मर्केल की चेतावनी
अमरीका में डोनल्ड ट्रम्प के सत्ता में आने के बाद से इस देश की एकपक्षीय नीतियों में नई जान पड़ गई है। ट्रम्प का मानना है कि एकपक्षीय नीतियों से अपने प्रतिस्पर्धियों पर अमरीका के वर्चस्व और उसकी शक्ति में वृद्धि होगी। अलबत्ता उनके इस दृष्टिकोण के आधार पर अमरीका की कार्यवाहियों पर वाॅशिंग्टन के मित्रों और घटकों तक की चिंताएं बढ़ गई हैं।
जर्मनी की चांस्लर एंगला मर्केल ने संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा के अधिवेशन में अपने भाषण में ट्रम्प की विदेश नीति के ख़तरनाक आयामों और परिणामों और इसी तरह संयुक्त राष्ट्र संघ के ढांचे को बर्बाद करने की ओर से चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ट्रम्प, बहुपक्षीयवाद को समस्याओं के समाधान का मार्ग नहीं समझते और किसी भी स्थिति में दोनों पक्षों के लिए जीत को नहीं मानते बल्कि केवल अमरीका की जीत के अवसर की ही तलाश में रहते हैं। मर्केल ने बहुपक्षीयवाद पर हमले को, विश्व व्यवस्था के लिए सबसे अहम ख़तरा बताया। यूरोपीय देशों के विचार में अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने बड़े सुनियोजित ढंग से बहुपक्षीयवाद के सभी नियमों और तंत्रों को तबाह करने की कोशिश की है। पहले उन्होंने अमरीका को पेरिस जलवायु समझौते से बाहर निकाला और उसके बाद ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते से भी अमरीका निकल गया। ट्रम्प ने यहीं पर बस नहीं किया बल्कि यूनेस्को और राष्ट्र संघ मानवाधिकार परिषद से भी अमरीका को बाहर निकाल लिया। इसी के साथ उन्होंने चीन,मैक्सिको, कनाडा और यूरोपीय संघ के साथ व्यापारिक युद्ध भी छेड़ दिया है।
अमरीका का एकपक्षीयवाद, जो अभी भी अपने आपको संसार की एकमात्र बड़ी शक्ति समझता है और इसी खोखली कल्पना के आधार पर अंतर्राष्ट्रीय मामलों में दूसरों के लिए दायित्व निर्धारित करता है, हालिया वर्षों में माॅस्को और बीजिंग की ओर से वाॅशिंग्टन पर सबसे अहम आपत्तियों में से एक है और इन दोनों ने कई बार अमरीका की एकपक्षीय कार्यवाहियों का विरोध किया है। रोचक बात यह है कि ट्रम्प के एकपक्षवादी रवैये का सुरक्षा परिषद के दायित्वों में गड़बड़ी, अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अराजकता फैलने, विश्व स्तर पर रुढ़िवाद में वृद्धि और मानवता के लिए ख़तरा बनने वाली जलवायु परिवर्तन की समस्या जैसे ख़तरों से मुक़ाबले की अंतर्राष्ट्रीय कोशिशों की विफलता के अलावा और कोई परिणाम नहीं निकला है। इसी तरह ट्रम्प द्वारा परमाणु समझौते के कड़े विरोध को संसार की अन्य बड़ी शक्तियां विश्व शांति व सुरक्षा के ख़तरे में पड़ने का कारण बता रही हैं। (HN)