अमेरिकी आशा निराशा में क्यों बदल गयी है?
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ईरान ने अपने तेल की बिक्री और उसके निर्यात के लिए रूस के साथ एक समझौता किया है। इस समझौते के अनुसार ईरान एक वर्ष में 50 लाख टन तेल रूस को निर्यात करेगा। ईरान ने अपने तेल की पहली खेप रूस को नवंबर 2017 में रवाना की थी। उस खेप में 10 लाख टन तेल था।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Nov १२, २०१८ १६:१० Asia/Kolkata

ईरान ने अपने तेल की बिक्री और उसके निर्यात के लिए रूस के साथ एक समझौता किया है। इस समझौते के अनुसार ईरान एक वर्ष में 50 लाख टन तेल रूस को निर्यात करेगा। ईरान ने अपने तेल की पहली खेप रूस को नवंबर 2017 में रवाना की थी। उस खेप में 10 लाख टन तेल था।

ईरान के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों का दूसरा चरण पांच नवंबर से लागू हुआ है जबकि प्रतिबंधों का पहला चरण 6 अगस्त से लागू हुआ है। इन प्रतिबंधों का मूल लक्ष्य ईरानी तेल की बिक्री को शून्य तक पहुंचाना और दूसरे देशों के साथ ईरान के बैंकिंग व व्यापारिक लेन- देन को ठप्प कर देना है।

इस दिशा में अमेरिका के पूरे प्रयास के बावजूद उसे विफलता का सामना है। उसकी विफलता के बहुत से कारण हैं परंतु दो चीज़ों की ओर से मुख्य रूप से संकेत किया जा सकता है। पहला कारण यह है कि ईरानी तेल के जो महत्वपूर्ण ख़रीदार हैं वे अमेरिका की वर्चस्ववादी नीतियों के मुकाबले में प्रतिरोध कर रहे हैं और दूसरा कारण यह है कि वाइट हाउस तेल की अंतरराष्ट्रीय मंडी में तेल के कम हो जाने और उसके मूल्यों के अधिक हो जाने से चिंतित है।

साथ ही ईरान ने अपने तेल की बिक्री और उसके निर्यात के लिए रूस के साथ एक समझौता किया है। इस समझौते के अनुसार ईरान एक वर्ष में 50 लाख टन तेल रूस को निर्यात करेगा। ईरान ने अपने तेल की पहली खेप रूस को नवंबर 2017 में रवाना की थी। उस खेप में 10 लाख टन तेल था।

मास्को ने बल देकर कहा है कि वह ईरान के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरान से तेल का आयात जारी रखेगा और यह कार्यक्रम अगले पांच वर्षों तक जारी रहेगा। साथ ही रूस के ऊर्जामंत्री एलेक्ज़न्डर नोवाक ने कहा है कि अगले वर्षों में भी ईरान स्वतंत्र रूप से अपने तेल का निर्यात जारी रखेगा और इस देश के तेल के ख़रीदारों से सहकारिता जारी रखेगा।

रूसी ऊर्जा मंत्री के कथनानुसार ईरान के अंदर इस बात की तत्परता मौजूद है कि वह स्वतंत्र रूप से अपने तेल का निर्यात जारी रखेगा और अपने तेल के ख़रीदारों के साथ सहयोग करता रहेगा। इस रूसी अधिकारी का बल दिया जाना इस बात का सूचक है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कड़ा होने की स्थिति में भी ईरान ने तेल निर्यात के संबंध में अपनी स्वतंत्र नीति की यथावत सुरक्षा की है।

ईरान का कहना है कि हर देश को अपने कोटे से अधिक तेल नहीं निकलना चाहिये। ध्यान योग्य बात यह है कि दुनिया में सबसे अधिक तेल का निर्यात रूस और सऊदी अरब करते हैं और जब तेल का उत्पाद अधिक हो जायेगा तो तेल का मूल्य भी कम हो जायेगा तो सबसे अधिक क्षति भी इन्हीं दोनों देशों को होगी।

इस आधार पर अधिक नुकसान से बचने के लिए तेल के उत्पादन को कम करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है।

बहरहाल अमेरिका को अपेक्षा है कि ईरानी तेल पर प्रतिबंध लगाने से तेल की मंडी में तेल कमी हो जायेगी जिसकी भरपाई कुछ तेल निर्यातक देशों से हो जायेगी परंतु इस समय उसकी यह आशा निराशा में बदल गयी है। MM