ब्रिटेन को नहीं दिखाई देते सऊदी अरब और इमारात के अपराध
टाइम्ज़ मैगज़ीन ने एक लेख प्रकाशित किया है जिसमें लेखक डेविड आरोनोविट्ज़ का कहना है कि ब्रिटेन अपने मित्र देशों के अपराधों को जान बूझकर नज़रअंदाज़ करता है।
लेखक का कहना है कि जब तक इमारात और सऊदी अरब हमारे ऊपर अपना माल लुटाते रहेंगे हमको यही महसूस होगा कि यह देश जितना चाहें मानवाधिकारों का हनन करें हमें इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।
यदि देखा जाए तो इमारात ने ब्रिटिश नागरिक मैथ्यु हेड्जेज़ के साथ जो रवैया अपनाया वह बेहद आपत्तिजनक था। क्या किसी मित्र देश से इसकी कल्पना की जा सकती है? ब्रिटिश अध्ययनकर्ता हेड्जेज़ को कई महीने इमारात की जेल में गुज़ारने पड़े और उन पर ब्रिटेन के लिए जासूसी का आरोप लगाकर उन्हें आजीवन कारावास की सज़ा सुना दी गई बाद में उन्हें माफ़ी मिली और वह आज़ाद हुए।
टाइम्ज़ मैगज़ीन के साथ बातचीत में हेड्जेज़ ने बताया कि उनके साथ इमारात में बहुत बुरा सुलूक किया गया और उन्हें यातनाएं दी गईं, यह तो मेरी ख़ुश क़िस्मती थी कि जिस समय मुझे एयरपोर्ट पर गिरफ़तार किया गया मेरी मां मेरे साथ थी अतः गिरफ़तारी की बात तत्काल सामने आ गई और रिहाई की कोशिशें भी शुरू हो गईं वरना इमारात एसी जगह है कि जहां शायद इंसान कई साल काल कोठरी में पड़ा रहे और किसी को इसकी ख़बर तक न हो। कई दिन बाद मुझे फ़ोन करने की अनुमति मिली।
यह सब कुछ होता रहा और दूसरी ओर ब्रिटेन और इमारात के बीच व्यापारिक संबंधों में विस्तार भी जारी रहा। इस साल दोनों देशों के व्यापार में 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
लेखक का कहना है कि यही चीज़ सऊदी अरब के वरिष्ठ पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या के मामले में भी देखने में आई है। अमरीका के सेनेटर लिंडसे ग्राहम ने तो साफ़ साफ़ कहा कि यदि हम इस मामले में यह यक़ीन नहीं कर पाते कि ख़ाशुक़जी की हत्या पहले से तैयार की गई योजना के तहत हुआ और इस पूरी योजना में बिन सलमान का हाथ था तो इसका मतलब यह है कि हम जान बूझ कर अंधे बन रहे हैं।
इन बातों को देखा जाए तो हम साफ़ साफ़ कह सकते हैं कि हम भ्रष्ट दुनिया में जी रहे हैं जहां आर्थिक हित और स्ट्रैटेजिक कारक सबसे अधिक महत्व रखते हैं।
ख़ाशुक़जी के मामले में अमरीकी रक्षा मंत्री जेम्ज़ मैटिज़ ने फिर यही कहा है कि अब तक इस बात के ठोस प्रमाण नहीं हैं कि पत्रकार की हत्या में बिन सलमान का हाथ है। इससे साफ़ ज़ाहिर है कि इतना सब कुछ हो जाने के बावजूद ट्रम्प सरकार बिन सलमान से हाथ नहीं धोना चाहती।
मगर यह भी तथ्य है कि अमरीकी कांग्रेस में इस बात की प्रबल इच्छा दिखाई देने लगी है कि बिन सलमान को दंडित ज़रूर किया जाए। कुछ लोग यह बात भी कर रहे हैं कि बिन सलमान और सऊदी अरब को एक दूसरे से अलग रखकर फ़ैसला करना चाहिए। अर्थात सऊदी अरब की स्थिति और महत्व की वजह से बिन सलमान के कृत्य को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।
मगर दूसरी ओर ट्रम्प प्रशासन की नज़रें सऊदी अरब से हासिल होने वाले आर्थिक फ़ायदों पर है। यहां तक कहा जा रहा है कि ट्रम्प और उनके परिवार को सऊदी अरब से व्यक्तिगत लाभ भी मिल रहा है और कई अमरीकी सांसद कह चुके हैं कि इसकी भी जांच ज़रूर कर ली जानी चाहिए।
शायद इसी लिए कहा जाता है कि पश्चिमी संस्कृति में आर्थिक हित हर सिद्धांत से ऊपर होते हैं।