कुछ चर्चा चीन की बेल्ट एंड रोड योजना की,
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 26 और 27 अप्रैल को बीजिंग में दूसरे बेल्ट एंड रोड फ़ोरम की मेज़बानी की।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Apr २९, २०१९ १५:२३ Asia/Kolkata
  • कुछ चर्चा चीन की बेल्ट एंड रोड योजना की,

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 26 और 27 अप्रैल को बीजिंग में दूसरे बेल्ट एंड रोड फ़ोरम की मेज़बानी की।

दुनिया के 125 देश और 40 अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव से जुड़ चुकी हैं। बीआरआई एक बहुत बड़ी योजना है जिसका उद्देश्य पूरे यूरेशियाई भूखंड को तथा उसके आस पास, क़रीब और दूर स्थित दक्षिण पूर्वी, दक्षिणी और पश्चिमी एशिया, अफ़्रीक़ा और लैटिन अमेरिका के बीच आपस में जुड़ी ज़मीन और समुद्री इंफ़्रास्ट्रक्चर, व्यापार और निवेश के तहत संपर्क स्थापित करना।

37 देशों के राष्ट्राध्यक्षों, कई देशों के मंत्रियों और 5 हज़ार प्रतिनिधिमंडलों ने इस फ़ोरम में भाग लिया जो बीआरआई की बढ़ती लोकप्रियता का चिन्ह है। बीआरआई के शीर्षक के साथ 175 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। 90 अरब डालर की योजनाओं पर अमल हो चुका है जबकि इंफ़्रांस्ट्रक्चर पर 1 हज़ार अरब डालर ख़र्च करने की योजना बनाई गई है।

अमरीका ने बीआरआई का विरोध खुले आम कर दिया है और प्रगतिशील देशों तथा अपने घटकों से कहा है कि वह इस योजना से दूर रहें। यही नहीं अमरीका ने इसके लिए एक राजनैतिक और मीडिया अभियान भी चलाया। यह कहा गया कि चीन के क़र्ज़े के चक्रव्यहू में फंसने से बचना बहुत ज़रूरी है। चीन के क़र्ज़ों को लेकर विशेष रूप से देशों को डराया जाता है लेकिन यह भी सच्चाई है कि 90 प्रतिशत से अधिक विकासशील देश पश्चिमी देशों और संस्थाओं से ऋण ले चुके हैं और हर साल उनकी नक़्दी करेंसी का लगभग 30 प्रतिशत भाग क़र्ज़े की क़िस्तों की भेंट चढ़ जाता है। यह क़र्ज़ा ख़राब पश्चिमी विकास सहायता का नतीजा है जिसने क़र्ज़ लेने वाले देशों के विकास में बहुत सीमित भूमिका निभाई है।

भारत ने ख़ुद को इस योजना से अलग रखा है जबकि पाकिस्तान बहुत बुनियादी रूप से इस योजना का हिस्सा बना है। इस योजना से कुछ देश प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं जबकि कुछ देश इस प्रकार के भी हैं जो किसी तीसरे देश मे चीन के साथ सहयोग के कारण इस योजना का हिस्सा बन रहे हैं।

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि चीन ने बहुत बड़ी योजना की शुरूआत की है और इसके लिए वह निवेश तथा नीति निर्धारण बहुत आक्रामक अंदाज़ में कर रहा है, चीन अपनी इस योजना को सफल बनाने के लिए नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश और म्यांमार जैसे क़रीबी देशों के साथ ही यूरोप, अफ़्रीक़ा और लैटिन अमेरिका के देशों में निवेश कर रहा है। बताया जाता है कि चीन ने अपने साठ शहरो को यूरोप के 51 शहरों से जोड़ देने की दिशा में प्रभावी रूप से क़दम उठाए हैं।

अब स्थिति यह है कि बड़ी संख्या में देश इस योजना से जुड़ गए हैं या इसका समर्थन कर रहे हैं जबकि कुछ देश जो इस योजना से ख़ुद को अलग रख रहे हैं उनके पास प्रतिक्रिया तो है लेकिन कोई जवाबी ठोस योजना की कमी उनके यहां साफ़ नज़र आती है।