पश्चिमी एशिया में अमरीकी सैन्य उपस्थिति बढ़ी, जापान का विरोध
जापान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पश्चिमी एशियाई क्षेत्र में अतिरिक्त सैनिक भेजने के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के फ़ैसले की आलोचन की है।
यासूत्शी नीशामारो ने पश्चिमी एशियाई क्षेत्र में एक हज़ार अतिरिक्त सैनिकों को भेजने की अमरीकी योजना के बारे में कहा कि उनका देश अमरीका की इस कार्यवाही पर चिंता व्यक्त करते हुए यह मानना है कि अधिक से अधिक सैनिकों का भेजना क्षेत्र में तनाव में वृद्धि का कारण बनेगा।
इससे पहले मरीकी रक्षामंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी पैट्रिक शैन्हान ने मंगलवार को एक बयान में कहा था कि अतिरिक्त सैनिकों को भेजने के लिए पश्चिमी एशिया में अमरीकी सेन्ट्रल कमान्ड की ओर से अपील तथा अमरीकी चीफ़ आफ़ आर्मी स्टाफ़ की सिफ़ारिश तथा वाइट हाऊस से सलाह के बाद क्षेत्र में नये सैनिको ंको भेजने का फ़ैसला किया गया है।
वाशिंग्टन की ओर से उक्त भड़काऊ कार्यवाही को रक्षा उद्देश्य क़रार दिया जा रहा है। शैन्हान ने ट्वीट किया कि आज का फ़ैसला, पश्चिमी एशिया में तैनात अपने सैनिकों की रक्षा और इसी प्रकार राष्ट्रीय हितों को बचाने के लिए किया गया है।
इससे पहले 24 मई को अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने मध्यपूर्व में अतिरिक्त 1500 सैनिकों को तैना करने की घोषणा की थी। अमरीका अंतर्राष्ट्रीय मंच पर ज़ोर ज़बरदस्ती और ग़ुंडा गर्दी की परिधि में एकपक्षीय नीति अपनाए हुए है ताकि दूसरे देशों के हितों और अधिकारों पर पड़ने वाले ग़लत प्रभाव की अनदेखी करते हुए अपने हितों की पूर्ती करता रहे।
जापान के इस वरिष्ठ अधिकारी का यह बयान उस हालत में सामने आया है कि जबकि टोक्यो अमरीका का निकटवर्ती घटक समझा जाता है। इससे यह पता चलता है कि अमरीका की एकपक्षीय और युद्धोन्मादी नीतियों से उसके निकटवर्ती घटक तक नाराज़ हैं क्योंकि उनको पता है कि अमरीका की इस कार्यवाही से क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता को गंभीर ख़तरा पैदा हो सकता है। (AK)