पश्चिम की कथनी और करनी विरोधाभास का खुला नमूना
मानवाधिकारों की रक्षा के संबंध में दोहरे मापदंड से काम लिया जाना, मानवाधिकारों की रक्षा से संबंधित संगठनों व संस्थाओं पर विश्व समुदाय के विश्वास व भरोसे में कमी का कारण बनेगा।
विदित रूप से आज मानवाधिकारों के बहुत से लोग व देश समर्थक हैं परंतु इनमें से बहुत से मानवाधिकार समर्थक इस विषय का प्रयोग राजनीतिक व आर्थिक हितों को साधने के लिए करते हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यहां तक कि मानवाधिकारों की रक्षा का दम भरने वाले पश्चिमी व यूरोपीय देशों में भी दोहरा मापदंड पाया जाता है और यह बात अमेरिका, फ्रांस और कनाडा सहित पश्चिमी देशों में आम है और जब तक मानवाधिकारों की रक्षा के संबंध में दोहरे मापदंड से काम लिया जाता रहेगा तब तक मानवाधिकार का विषय और वास्तविकताएं राजनीतिक और आर्थिक हितों की भेंट चढ़ती रहेंगी।
ईरान की न्यायपालिका प्रमुख सैयद इब्राहीम रईसी ने मानवाधिकार के संबंध में पश्चिम में मौजूद दोहरे मापदंड की आलोचना की और इस संबंध में कुछ नमूनों को बयान किया जो स्पष्ट रूप से पश्चिम के दोहरे मापदंड के सूचक हैं।
फिलिस्तीनियों के साथ जायोनी शासन जो अपराध कर रहा है और अमेरिका एवं कुछ पश्चिमी देशों के समर्थन से सऊदी अरब यमनी जनता पर जो अत्याचार ढ़ा रहा है उस पर अंतरराष्ट्रीय संगठन व संस्थाएं अर्थपूर्ण चुप्पी साधे हुए हैं और ईरान की न्यायपालिका प्रमुख ने इसी प्रकार उन देशों की भी आलोचना की जो तेहरान के खिलाफ प्रतिबंधों के बहाने ईरानी जनता तक दवाओं और चिकित्सा सेवाओं के पहुंचने में बाधा बने हुए हैं।
रोचक बात यह है कि अमेरिका और कुछ यूरोपीय व पश्चिमी देश उस हालत में मानवाधिकार की रक्षा का दम भर रहे हैं जब स्वयं इन देशों को अपने यहां मानवाधिकार की गम्भीर चुनौतियों का सामना है।
फ्रांस में कई महीनों से हर शनिवार को होने वाले "पीली जैकेट" के नाम से प्रसिद्ध आंदोलन को इसी दिशा में देखा जा सकता है।
अमेरिका में मानवाधिकार के एक अध्ययनकर्ता राबर्ट फेन्टीना इस देश में मानवाधिकार के संबंध में मौजूद बहुत अधिक विरोधाभासों के बारे में कहते हैं" अमेरिकी मानवाधिकार का संबंध सीधे रूप से तेल से होने वाली आय और आर्थिक हितों से है अतः जब भी अमेरिका के आर्थिक हितों की पूर्ति होगी वहां मानवाधिकार अर्थपूर्ण होगा"
स्पष्ट है कि मानवाधिकारों की रक्षा के संबंध में दोहरे मापदंड से काम लिया जाना, मानवाधिकारों की रक्षा से संबंधित संगठनों व संस्थाओं पर विश्व समुदाय के विश्वास व भरोसे में कमी का कारण बनेगा।
बहरहाल अमेरिका और पश्चिम के समस्त दबावों के बावजूद मानवाधिकार के संबंध में ईरान एक सक्रिय देश है और इस संदर्भ में वह पारदर्शी तरीके से अपने दृष्टिकोणों को बयान करता है। MM