जी7 सदस्यों में केवल असहमत होने पर ही है सहमति
हाल के दशकों में शायद ही कभी ऐसी स्थिति बनी थी जब पश्चिमी देश आपस में इतने बंटे हुए नज़र आए हों। व्यापार, जलवायु परिवर्तन, ब्रेक्ज़िट या फिर चीन, ईरान और रूस के साथ संबंध, जी7 देश किसी भी मुद्दे पर एकमत नहीं हो पाए हैं।
प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, जी7 के धनि सदस्य देशों की दुनिया के अलग-अलग मुद्दों पर इस बार राय इतनी अलग-अलग देखने को मिल रही है कि इस बात की आशंका जताई जा रही है शायद पहली बार ऐसा देखने को मिलेगा कि जी7 सदस्यों में असहमत होने पर ही सहमति बन पाए। 24 से 26 अगस्त के बीच फ्रांस के बियारित्स में आयोजित हो रहे इस सम्मेलन में शायद पहली बार ही ऐसा हो कि 1975 के बाद से सम्मेलन बिना किसी संयुक्त बयान के ख़त्म हो जाए।
मेज़बान देश फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों जलवायु परिवर्तन और ब्राज़ील में अमाज़ोन के जंगलों के जलने को मुख्य मुद्दा बनाना चाहते हैं। वहीं पर्यावरण समेत कई और मुद्दों से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प बिल्कुल इत्तेफाक़ नहीं रखते। चीन के साथ व्यापारिक युद्ध में लगे हुए ट्रम्प यूरोपीय संघ और अन्य देशों से होने वाले आयात पर शुल्क लगाने का विचार व्यक्त कर चुके हैं। इसके अलावा जी7 के साथ रूस को फिर से शामिल करने के उनके उपाय को बाक़ी सदस्यों का विरोध झेलना पड़ा है। यूक्रेन से क्रीमिया को अलग किए जाने के क़दम के बाद रूस को जी8 से बाहर निकाल दिया गया था।
फ्रांस में माक्रों ने अमेरिकी टेक कंपनियों पर जो नए टैक्स लगाए हैं उनसे ट्रम्प नाख़ुश हैं। इसका बदला लेने के लिए ट्रम्प फ्रेंच की एक कंपनी के निर्यात को निशाना बनाने की बात कह चुके हैं। इसके अलावा जी7 सम्मेलन में अगर जर्मनी किसी तरह के फिस्कल स्टिमुलस की घोषणा करे तो उस पर दुनिया भर के बाज़ारों और निवेशकों की नज़र होगी। ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन का यह पहला जी7 सम्मेलन है। जर्मन चांसलर एंगेला मैर्केल और माक्रों से इससे पहले हुईं जॉनसन की मुलाक़ातें बहुत सफल नही रही हैं। जॉनसन अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से दोस्ताना बातचीत की उम्मीद है, लेकिन ब्रिटेन खुद भी अमेरिकी कंपनियों पर डिजिटल टैक्स लगाना चाहता है और रूस के मुद्दे पर बाक़ी यूरोप जैसी सोच रखता है। ऐसे में ट्रम्प से दोस्ती होने की उम्मीदें काफ़ी कमज़ोर हैं।
कुल मिलाकर ट्रम्प अमेरिका की आर्थिक नीतियों के बारे में अन्य सदस्यों को बताना चाहते हैं और बताया जाता है कि वे बाक़ियों को भी अपने नक़्शे क़दम पर चल कर वैश्विक अर्थव्यवस्था से जु़ड़ी समस्याओं से बचने की सलाह देने वाले हैं। सम्मेलन के दौरान ट्रम्प ब्रिटेन, जर्मनी, जापान, भारत और कनाडा के नेताओं के साथ अलग अलग मुलाक़ातें भी कर रहे हैं। (RZ)