ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्या संसद निलंबित कर कराएंगे ब्रेग्ज़िट?
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने महारानी एलिज़ाबेथ-2 से आग्रह करके ब्रिटेन की संसद को 14 अक्तूबर तक के लिए निलंबित करा दिया है। माना जा रहा है कि इसका एक असर यह भी हो सकता है कि ब्रिटेन यूरोपीय संघ से 31 अक्टूबर की तय तारीख़ को बिना किसी समझौते के ही बाहर हो जाएगा।
ब्रेग्ज़िट को लेकर ब्रिटिश सरकार की कोशिशों से इस देश के आम लोगों और कारोबारियों में एक तरह का डर पैदा हो गया है। बहुत से लोगों ने इस फ़ैसले की निंदा की है और इसे एक "तानाशाही" क़दम माना है। ब्रेग्ज़िट के समर्थक लेकिन इसे एक निर्णायक क़दम मान रहे हैं और अब उन्हें विश्वास हो गया है कि जनमत संग्रह के ठीक तीन साल बाद ब्रिटेन, यूरोपीय संघ से बाहर बाहर हो जाएगा। दूसरी ओर कई ब्रिटिश राजनेता संसद के निलंबन और ब्रेग्ज़िट से बाहर निकलने के तरीक़ों पर संघर्ष के लिए ख़ुद को तैयार करने में जुटे हैं लेकिन एक सवाल यह भी है कि आख़िर ब्रेग्ज़िट पर इस क़दम का क्या असर हो सकता है? इस बीच ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने ब्रिटेन की महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय से कहा है कि वे सरकार के एजेंडे के बारे में 14 अक्टूबर को भाषण दें। आमतौर पर जब ब्रिटेन की महारानी भाषण देती हैं तो एक सप्ताह के लिए संसद निलंबित रहती है और महारानी ने संसद को निलंबित रखने की मंज़ूरी दे दी है।
इसकी क्यों अहमियत है?
इसका एक असर यह हो सकता है कि ब्रेग्ज़िट बिना किसी समझौते के ही हो जाए। संसद का निलंबन पहले से ही मध्य सितंबर से अगले तीन सप्ताह के लिए तय है। यह समय मुख्य राजनीतिक दलों को उनके सालाना सम्मेलनों के लिए दिया जाता है, इसका मतलब है कि जब 3 सितंबर को सांसद संसद में आएंगे तो मध्य अक्टूबर तक चलने वाली छुट्टी से पहले उनके पास काम के कुछ ही दिन होंगे। ऐसे में ब्रिटेन को बिना समझौते के 31 अक्टूबर को यूरोपीय संघ से बाहर जाने से रोकने पर बहस या फिर कोई बिल पारित करने के लिए बहुत कम समय होगा। ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन का कहना है कि वह ब्रिटेन को यूरोपीय संघ से तय तारीख़ पर बाहर ले आएंगे चाहे कुछ भी हो। जॉनसन इस तरह के बयान से ब्रिटेन के व्यापार और कारोबारी क्षेत्र में बड़ी अफ़रा-तफ़री का वातावरण पैदा हो गया है, क्योंकि ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के देशों के बीच शुल्क और निगरानी को लागू कर दिया जाएगा।
क्या ब्रिटेन के सांसद इस निलंबन को रोक सकते हैं?
यह स्पष्ट नहीं है लेकिन वे इसके लिए कोशिश करेंगे और सांसद सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास का प्रस्ताव ला सकते हैं, अगर यह प्रस्ताव पास हो गया तो आमतौर पर सरकार गिर जाती है। बर्मिंघम यूनिवर्सिटी में अंतर्राष्ट्रीय राजनीति पढ़ाने वाले प्रोफेसर स्कॉट लूकस कहते हैं कि जॉनसन इस मांग की अनदेखी करेंगे। उम्मीद की जा रही है कि 3 सितंबर से जब संसद की कार्यवाही शुरू होगी तो सांसद आपातकालीन विधेयक पास कर संसद को चालू रखने की कोशिश करेंगे। लूकस का कहना है कि इसके तुरंत बाद ही अदालती लड़ाई शुरू हो जाएगी लेकिन अभी यह साफ़ नहीं है कि उनके पास पर्याप्त समय होगा कि नहीं। लूकस का कहना है कि "1930 के बाद यह अब तक का सबसे बड़ा संवैधानिक संकट है।" इससे पहले 1930 में ब्रिटेन के तत्कालीन राजा एडवर्ड द्वितीय ने अपनी प्रेमिका से शादी करने के लिए सत्ता का त्याग कर दिया था। नतीजा क्या होगा यह अभी साफ नहीं है, दुनिया के ज़्यादातर लोकतांत्रिक देशों के उलट ब्रिटेन का लिखित संविधान नहीं है और ऐसे में यह निर्देशों के लिए अधिकतर परंपराओं पर ही निर्भर करता है।
महारानी की भूमिका क्या होगी? क्या वह बिना समझौते के ब्रेग्ज़िट को रोक सकती हैं?
सैद्धांतिक रूप से महारानी के पास किसी क़ानून को रोकने या फिर नई सरकार चुनने का अधिकार है लेकिन परंपरा यह है कि वह अपने दम पर राजनीतिक फ़ैसले नहीं लेती। उदाहरण के लिए सरकार ने महारानी के लिए जो भाषण लिखा है वह उसे सामान्य रूप से पढ़ देती हैं। बुधवार को जब सरकार ने निलंबन का अनुरोध किया तो उन्होंने इस पर तुरंत सहमति दे दी। ब्रिटेन का शाही परिवार किसी भी राजनीतिक फ़ैसले में हस्तक्षेप देने के प्रति सजग रहता है और ऐसे में इस बात की कम ही उम्मीद है कि महारानी किसी क्षण इस मामले में दख़ल दे कर बिना समझौते के ब्रेग्ज़िट को रोकेंगी।
बिना समझौते के ब्रेग्ज़िट अगर संसद नहीं रोक सकी तो क्या यूरोपीय संघ रोक सकेगा?
यूरोपीय संघ इसे नहीं रोक सकता है। ब्रिटेन ईयू से 31 अक्टूबर को बाहर हो जाएगा। इसे रोकने का यही तरीक़ा है कि यूरोपीय संघ से बाहर जाने के फ़ैसले पर ब्रिटेन की संसद मुहर लगा दे और फिर इसे आगे बढ़ाने के लिए एक नई तारीख़ तय करे और उस पर यूरोपीय संघ सहमत हो, या फिर यह हो कि ब्रिटेन यूरोपीय संघ से बाहर जाने के निर्णय को छोड़ दे।
बिना समझौते के ब्रेग्ज़िट के कितने आसार हैं?
बोरिस जॉनसन के जुलाई में प्रधानमंत्री बनने के बाद इसके आसार बढ़ गए हैं और संसद के निलंबन ने इस संभावना को और तेज़ कर दिया है। बुधवार को इस ख़बर के आने के बाद पाउंड की क़ीमत डॉलर के मुक़ाबले एक दिन पहले के 1.2290 से घट कर 1.2211 पर चली गई और यह बीते 28 महीने के सबसे कम स्तर यानी 1.2100 से अधिक दूर नहीं है जहां यह इसी महीने की शुरुआत में पहुंचा था। ब्रेग्ज़िट समर्थकों का कहना है कि अगर जॉनसन बिना समझौते के ब्रेग्ज़िट की आशंका को मज़बूत कर देते हैं तो बहुत संभव है कि यूरोपीय संघ 31 अक्टूबर के पहले इस बारे में नया समझौता करेगा। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोपीय संघ पहले से ही इस ख़तरे को बहुत गंभीरता से ले रहा है और ब्रिटेन को अन्य यूरोपीय संघ के मुक़ाबले इससे ज़्यादा आर्थिक नुक़सान होने की आशंका है। (RZ)