हिज़्बुल्लाह संगठन से गुटेरस की व्यर्थ अपेक्षाएं
संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव अंटोनियो गुटेरस ने लेबनान की सरकार से मांग की है कि वह हिज़्बुल्लाह संगठन का निरस्त्रीकरण करे।
लेबनान के हिज़्बुल्लाह संगठन और उसकी सैन्य क्षमताओं ने ज़ायोनी शासन के हमलों को रुकवाने और लेबनान की शांति, सुरक्षा व स्थिरता को मज़बूत अहम भूमिका निभाई है। शायद संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव अंटोनियो गुटेरस यह भूल गए हैं कि राष्ट्र संघ और उसकी सुरक्षा परिषद की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी विश्व शांति व सुरक्षा की रक्षा है और लेबनान में इस्लामी प्रतिरोध ने जो प्रतिरक्षा क्षमता पैदा कर दी है वह क्षेत्र में ज़ायोनी शासन के हमलों को रोकने में बहुत अहम रही है। रायुल यौम समाचारपत्र के प्रधान संपादक ने भी लिखा है कि प्रतिरोधक मोर्च की "मीज़ाइल क्रांति" की छाया में वह समय समाप्त हो गया है जब अवैध क़ब्ज़ा करने वाली ज़ायोनी सरकार, अरबों के ख़िलाफ़ युद्ध को कुछ दिनों में बल्कि कुछ घंटों में ही ख़त्म कर दिया करती थी।
इस्राईल की नेश्नल न्यूज़ वेबसाइट ने ज़ायोनी शासन के इस दावे के समर्थन में महासचिव अंटोनियो गुटेरस के इस बयान का उल्लेख करते हुए कि हिज़्बुल्लाह के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में संयुक्त राष्ट्र संघ की सेना किसी भी प्रकार की कार्यवाही करने में सक्षम नहीं है, लिखा है कि महासचिव ने लेबनान की सरकार से कहा है कि वह हिज़्बुल्लाह से हथियार रखवा ले। संयुक्त राष्ट्र संघ की ताज़ा रिपोर्ट में, जिस पर महासचिव गुटेरस के दस्तख़त हैं, अमरीका व ज़ायोनी शासन की भड़काऊ व हस्तक्षेपपूर्ण कार्यवाहियों की तरफ़ किसी भी तरह का इशारा किए बिना अवैध अधिकृत क्षेत्रों में इस्राईली सैनिकों के एक ठिकाने पर सितम्बर में हिज़्बुल्लाह के हमले पर चिंता प्रकट की गई है। यह बात स्पष्ट नहीं है कि राष्ट्र संघ की सेना दक्षिणी लेबनान में हिज़्बुल्लाह के नियंत्रण वाले क्षेत्र में क्या कार्यवाही करना चाहती है? क्या वह अमरीका व ज़ायोनी शासन की हस्तक्षेपपूर्ण कार्यवाही का मार्ग समतल करना चाहती है? या फिर वह ज़ायोनी शासन की आक्रामक कार्यवाहियों के मुक़ाबले में हिज़्बुल्लाह के प्रतिरोध के क़ानूनी हक़ को छीनना चाहती है?
लेबनान में रूस के राजदूत अलेग्ज़ेंडर ज़ैसपेकीन ने लेबनानी राष्ट्रपति मिशल औन से मंगलवार को मुलाक़ात में कहा कि लेबनान के हालात में अमरीका की विध्वंसक भूमिका है। क्या यह संभव है कि अमरीका, लेबनान में विध्वंसक भूमिका निभाए और ज़ायोनी शासन का उसमें कोई सहयोग न हो? और क्या यह हो सकता है अमरीका व इस्राईल, क्षेत्रीय देशों में विध्वंसक कार्यवाहियां करते रहें और उन्हें उसकी क़ीमत न चुकानी पड़े? रूस के राजदूत ने गत शुक्रवार को भी अलमनार टीवी से बात करते हुए कहा था कि अमरीका के प्रतिबंध, लेबनान के मौजूदा हालात में दबाव की तरह हैं और वह इस देश में विध्वंसक भूमिका निभा रहा है। यही विध्वंसक भूमिका अमरीका व इस्राईल, ईरान, इराक़ व सीरिया में भी निभा रहे हैं और वाइट हाउस ने तो खुल कर इसे स्वीकार भी किया है।
संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव अंटोनियो गुटेरस ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में दावा किया है कि सितम्बर में इस्राईल के सैन्य ठिकाने पर हिज़्बुल्लाह का हमला, सशस्त्र गुटों की ओर से बढ़ते ख़तरे को दर्शाता है और यह गुट लेबनान की सरकार के नियंत्रण से बाहर रह कर गतिविधियां कर रहा है। उन्होंने इसी तरह कहा है कि हिज़्बुल्लाह और अन्य गुट क्षेत्र के बारे में राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव क्रमांक 1701 का उल्लंघन कर रहे हैं इस लिए लेबनान की सरकार को हिज़्बुल्लाह और अन्य गुटों को निरस्त्र करने के लिए आवश्यक कार्यवाही करनी चाहिए। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस समय दक्षिणी लेबनान में राष्ट्र संघ की सेना को एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने और कार्यवाहियां करने में बहुत अधिक रुकावटों का सामना है और उक्त सेना को उस स्थान पर जाने से रोका जा रहा है जहां सितम्बर में इस्राईली सैनिकों के ठिकाने पर मीज़ाइल फ़ायर किया गया था। (HN)