अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका की मध्यस्थता का नया चरण
अफ़ग़ानिस्तान के मामलों में अमरीका के विशेष प्रतिनिधि अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह से मुलाक़ात की है जो अपने आपको इस देश का राष्ट्रपति कहते हैं।
ज़लमई ख़लील ज़ाद ने काबुल में अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह से मुलाक़ात की और उनसे अफ़ग़ानिस्तान की विभिन्न समस्याओं विशेष कर अमरीका व तालेबान के बीच हुए समझौते के बारे में बात की। इस मुलाक़ात में हुई बातचीत का ब्योरा सामने नहीं आया है लेकिन लगता है कि अशरफ़ ग़नी और अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह के चुनाव संबंधी मतभेदों और दोनों के एक साथ राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बारे में विचार-विमर्श किया गया है।
यह ऐसी स्थिति में है कि शपथ ग्रहण समारोह से पहले अशरफ़ ग़नी और अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह के बीच मध्यस्थता की ख़लील ज़ाद की कोशिशें विफल हो गई थीं। इससे पहले अफ़ग़ानिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के पूर्व प्रमुख ने इस देश में युद्ध की समाप्ति और शांति स्थापना के बहाने अमरीका की कोशिशों को धूर्तता बताया था। ख़लील ज़ाद ने तीन हफ़्ते के अंदर दूसरी बार अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह से मुलाक़ात की है और इससे पता चलता है कि अफ़ग़ानिस्तान के हालात से तालेबान के साथ हुए समझौते पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों की ओर से अमरीकी अधिकारी कितने चिंतित हैं।
ऐसा लगता है कि अफ़ग़ानिस्तान के हालात अमरीकी की अपेक्षा की विपरीत दिशा में जाने की वजह से अमरीका, तालेबान के साथ हुए समझौते की विफलता की ओर से गहरी चिंता में है और इसी लिए अमरीकी सरकार ने ख़लील ज़ाद को दोबारा अफ़ग़ानिस्तान भेजा है ताकि वे अफ़ग़ानिस्तान में समानांतर सरकार बनाने वाले अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह को समझा बुझा कर तालेबान से हुए समझौते को विफल होने से रोकने की कोशिश करें। अलबत्ता चूंकि अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह कई बार कह चुके हैं कि वे देश में हुए राष्ट्रपति चुनाव के परिणामों पर कोई समझौता नहीं करेंगे इस लिए ऐसा नहीं लगता कि ख़लील ज़ाद के हाथ किसी प्रकार की कोई सफलता लग पाएगी। (HN)